राजगढ़-झुंझुनूं स्टेट हाईवे पर लम्बोर बड़ी टोल हटाने की मांग:पांच गांवों के लोग धरने पर बैठे, दूसरे दिन भी जारी, 26 फरवरी को महापंचायत
राजगढ़-झुंझुनूं स्टेट हाईवे पर लम्बोर बड़ी टोल हटाने की मांग:पांच गांवों के लोग धरने पर बैठे, दूसरे दिन भी जारी, 26 फरवरी को महापंचायत
सादुलपुर : राजगढ़-झुंझुनूं स्टेट हाईवे पर स्थित लम्बोर बड़ी टोल प्लाजा को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने टोल प्लाजा को अवैध बताते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की है। आंदोलन के दूसरे दिन टोल को पूरी तरह से निशुल्क रखा गया।
आंदोलन को लंबा चलाने के लिए विभिन्न गांवों की ड्यूटी लगाई गई है। दूसरे दिन बेरासर छोटा, बेरासर बड़ा, बेरासर गुमना और बेरासर मंजला सहित पांच गांवों के लोग धरने पर बैठे। इसी प्रकार अगले दिनों में अन्य गांवों के लोग भी धरने में शामिल होंगे। संघर्ष समिति के अजीत पूनिया ने बताया कि 26 फरवरी को किसानों की महापंचायत बुलाई गई है। इसमें टोल के उच्च अधिकारियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया है।
पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया और प्रमुख समाज सेवी एडवोकेट गायत्री पूनिया ने भी धरने को समर्थन दिया। कृष्णा पूनिया ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की मांग वाजिब है, क्योंकि यहां खेतों के लिए गुजरने वाले वाहनों को भी टोल देना पड़ता है और गांवों के रास्ते पर टी-प्वाइंट भी नहीं बनाए गए हैं। उन्होंने आंदोलनकारियों का समर्थन किया।
एडवोकेट गायत्री पूनिया ने आरोप लगाया कि टोल वसूलने की जल्दबाजी में कानूनी दायरे पूरे नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि न तो संकेत बोर्ड लगाए गए हैं और न ही डिवाइडर बने हैं, फिर भी टोल चालू कर दिया गया है, जो सरासर गलत है।

संघर्ष समिति ने टोल प्रबंधन से नौ सवालों के लिखित जवाब मांगे हैं। इनमें टोल प्लाजा किस सरकारी आदेश या अधिसूचना पर लगाया गया, क्या यह टोल नियम 2015 के तहत बनाया गया है, सड़क को आधिकारिक रूप से पूर्ण घोषित किया गया है या नहीं, और कंप्लीशन सर्टिफिकेट कब जारी किया गया जैसे प्रश्न शामिल हैं। समिति ने यह भी पूछा है कि यदि सड़क अधूरी है तो टोल क्यों वसूला जा रहा है, डीपीआर कब और किस विभाग ने स्वीकृत की तथा डीपीआर के अनुसार टोल वसूली का समय कितना है।
इस दौरान धरने पर प्रभुदयाल गोयल (पूर्व सरपंच, बैरासर छोटा), रामसिंह सहारण (पूर्व सरपंच, बैरासर छोटा), फतेह सिंह राहड़ (पूर्व सरपंच, लम्बोर बड़ी), तथा किसान संघर्ष समिति के रामनिवास पूनिया और नरेंद्र पूनिया (हमीरावास) ने भी अपना समर्थन दिया।
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