दरगाह बगड़ इज्जतुल्लाह शाह में शब- ए -बारात को इबादत का दौर चला
दरगाह बगड़ इज्जतुल्लाह शाह में शब- ए -बारात को इबादत का दौर चला
बगड़ : दरगाह हजरत इज्जतुल्लाह शाह बगड़ में शब- ए -बारात रात्रि कोई इबादत कर मनाई गई दरगाह के गद्दी नशीन पीर दीन मोहम्मद ने बताया कि शब-ए-बारात इस्लामिक कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 15 वीं रात को मनाई जाती है। फ़ारसी में ‘शब’ का अर्थ ‘रात’ और ‘बारात’ का अर्थ ‘मुक्ति या क्षमा’ होता है। इसे “क्षमा की रात” भी कहा जाता है क्योंकि माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के गुनाह माफ़ करता है और उनकी जायज़ दुआएँ कुबूल करता है। इस रात की कुछ मुख्य विशेषताएँ हैं:इबादतः मुसलमान रात भर जागकर नमाज़ (नफ़्ल), कुरान की तिलावत और ज़िक्र करते हैं। तकदीर का फैसलाः मान्यता है कि इस मुबारक रात को अल्लाह आने वाले साल के लिए हर जीव का भाग्य और जीविका (रिज़्क़) तय करता है।कब्रिस्तान जानाः लोग अपने दिवंगत प्रियजनों की मगफिरत (मोक्ष) के लिए दुआ करने कब्रिस्तान जाते हैं। दान और रोज़ाः इस दिन दान-पुण्य करना और अगले दिन रोज़ा रखना बहुत सवाब का काम माना जाता है।
यह रात तौबा करने और नई रूहानी शुरुआत करने का एक बेहतरीन अवसर होती है। गुनाहों की माफीः मान्यता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करता है और उनकी दुआएं कुबूल करता है। इबादत और दुआः मुसलमान पूरी रात जागकर नफ़्ल नमाज़ें पढ़ते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और अल्लाह से अपने भविष्य के लिए रहमत मांगते हैं। ओर अपने पूर्वजों को याद करते हैं इस रात लोग कब्रिस्तान जाकर अपने बुजुर्गों की कब्रों पर फातिहा पढ़ते हैं और उनके लिए मगफिरत (मोक्ष) की दुआ करते हैं। रोज़ाः शबे बारात के अगले दिन (15 शाबान) को नफ़्ल रोज़ा रखना भी बहुत सवाब का काम माना जाता है। दरगाह के शहजादा ए अबरार हुसैन ने कहा दरगाह और मस्जिद को सजाया गया है और रात भर इबादत का सिलसिला चलता रहेगा।
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