शिक्षक की दशा-दिशा पर चिंता, 41 सूत्री मांग पत्र सरकार को सौंपा
चूरू जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार सुण्डा ने प्रांतीय सम्मेलन में उठाई आवाज
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभागीय शिक्षक संघ के 51वें दो दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन में चूरू जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार सुण्डा ने शिक्षक की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जहां जापान में न्यायाधीश शिक्षक का सम्मान करता है और अमेरिका में प्राथमिक शिक्षक को राष्ट्र निर्माण की नींव मानकर उच्च वेतन दिया जाता है, वहीं भारत में शिक्षक की दशा चिंताजनक होती जा रही है।
सम्मेलन में प्रदेशाध्यक्ष अशोक तिवाड़ी के नेतृत्व में प्रदेशभर के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श कर 41 सूत्री मांग पत्र तैयार किया गया, जिसे संस्कृत शिक्षा विभाग एवं राज्य सरकार को प्रेषित किया गया। मांग पत्र में पारदर्शी स्थानांतरण नीति, लंबित डीपीसी, वेतन विसंगतियां दूर करने, पदों की समीक्षा, अधिशेष शिक्षकों का समायोजन, नए संस्कृत विद्यालय व कॉलेज खोलने, जिला संस्कृत शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित करने, शिक्षा बजट का 10 प्रतिशत संस्कृत शिक्षा को देने सहित अनेक महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।
इसके अलावा शिक्षक पुरस्कार कोटा बहाल करने, अनुदानित शिक्षकों को पेंशन लाभ, शारीरिक शिक्षक, कंप्यूटर अनुदेशक, पुस्तकालयाध्यक्ष व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के पद स्वीकृत करने, गैर-शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त करने तथा संस्कृत शिक्षा को निःशुल्क करने की भी मांग की गई। प्रदेश महामंत्री दयालसिंह काजला ने बताया कि मांग पत्र में शिक्षक, शिक्षार्थी और विभागीय स्तर के सभी ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
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