निजीकरण के विरोध में राजस्थान विद्युत कर्मचारियों का आंदोलन तेज, सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग
निजीकरण के विरोध में राजस्थान विद्युत कर्मचारियों का आंदोलन तेज, सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग

सूरजगढ़ : राजस्थान विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर के विद्युत कर्मचारियों, अधिकारियों और अभियंताओं ने अपने लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। संगठन ने सरकार और प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि छह माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। सूरजगढ़ में आज निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों द्वारा आज बुधवार दोपहर को बिजली दफ्तरों में कार्य बहिष्कार किया गया, जिसके चलते आज कार्यालय में आमजन से जुड़े कामकाज भी नही किए गए। बिजली कर्मचारियों द्वारा उपखंड अधिकारी सूरजगढ़ के पीए हरिश जांगिड़ को राज्य सरकार के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार द्वारा वितरण, उत्पादन और प्रसारण निगमों का निजीकरण किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। इसके विरोध में विद्युत कर्मचारी, अभियंता और अधिकारी चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो मजबूरन आंदोलन को उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों और अधिकारियों को लिखित में कोई सूचना या आदेश नहीं दिया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि विद्युत निर्माण के विभिन्न मॉडलों के नाम पर निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए। ज्ञापन देने वालों में संदीप सैनी, जय कुमार राव, जयवीर सिंह, हरिश कुमार, कुलदीप, सुनील कटारिया, आशीष सहित विद्युत विभाग सूरजगढ़ के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे ! संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को लेकर राजस्थान सरकार के संबंधित उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। इनमें ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव (ऊर्जा), विद्युत कंपनियों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक शामिल हैं। संघर्ष समिति ने सभी कर्मचारियों से आंदोलन को सफल बनाने के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया है।