बाबर किन परिस्थियों में भारत आये
ग्रोक बाबर किन परिस्थितियों में भारत आए या उसे लेन वाले कोन था

यह एक राजनीतिक और सैन्य परिस्थिति का परिणाम था। हालांकि, इतिहास में यह माना जाता है कि राणा संगा (मेवाड़ के सिसोदिया राजपूत शासक) और दौलत खान लोदी (पंजाब के लोदी शासक) जैसे कुछ स्थानीय शासकों की भूमिका अप्रत्यक्ष रूप से बाबर के भारत आगमन से जुड़ी थी।
संदर्भ:
दौलत खान लोदी: वह दिल्ली सल्तनत के अंतिम लोदी शासक इब्राहिम लोदी का गवर्नर था और उसने इब्राहिम के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। अपनी स्थिति मजबूत करने और इब्राहिम लोदी को हराने के लिए उसने बाबर, जो उस समय काबुल का शासक था, से सहायता मांगी। यह बाबर के लिए भारत में प्रवेश का एक अवसर बन गया।
राणा संगा: मेवाड़ के शक्तिशाली राजपूत शासक राणा संगा भी इब्राहिम लोदी के खिलाफ थे। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि उन्होंने बाबर को लोदी सल्तनत के खिलाफ लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया, यह सोचकर कि बाबर केवल लोदी को हराकर चला जाएगा। हालांकि, बाबर ने इसके बाद भारत में अपनी सत्ता स्थापित कर ली।
नतीजा: बाबर का भारत आगमन (1526 में पानीपत की पहली लड़ाई) मुख्य रूप से उसकी अपनी महत्वाकांक्षा और मध्य एशिया में अस्थिरता के कारण हुआ था, लेकिन दौलत खान लोदी और राणा संगा जैसे भारतीय शासकों की आपसी फूट और उनकी रणनीतियों ने उसे यहाँ आने का मौका दिया। इस तरह, दौलत खान लोदी को सबसे प्रत्यक्ष रूप से बाबर को “लाने” वाला भारतीय शासक माना जा सकता है।