खेतड़ी नगर में एटक का 107वां स्थापना दिवस मनाया, मजदूरों के अधिकारों पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प
यूनियन कार्यालय में हुआ ध्वजारोहण, पूर्व राष्ट्रीय महासचिव गुरुदास गुप्ता को दी श्रद्धांजलि; बैठक में मजदूरों की मांगों और यूनियन की उपलब्धियों पर हुई चर्चा
खेतड़ी नगर : एटक का 107वां स्थापना दिवस शुक्रवार को खेतड़ी नगर स्थित यूनियन कार्यालय में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत उपाध्यक्ष घीसाराम मीणा और खुशीराम यादव ने ध्वजारोहण कर की। इसके बाद एटक के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव एवं यूनियन के पूर्व संरक्षक कामरेड गुरुदास गुप्ता की पुण्यतिथि पर उपस्थित सदस्यों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कामरेड खुशीराम यादव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक को यूनियन महासचिव कामरेड बिडदुराम सैनी ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि एटक की स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को मुंबई में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हुई थी। उन्होंने कहा कि एटक ने मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने के साथ देश की आजादी की लड़ाई में भी भागीदारी निभाई। संगठन का नेतृत्व जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचंद्र बोस, वीवी गिरि, एसए डांगे, इंद्रजीत गुप्ता और गुरुदास गुप्ता सहित कई राष्ट्रीय नेताओं ने किया।
सैनी ने कहा कि आजादी से पहले कामगारों के हित में 44 केंद्रीय श्रम कानून बनवाने में एटक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनमें श्रमिक संगठन बनाने का अधिकार, वेतन भुगतान, दुर्घटना मुआवजा, औद्योगिक विवाद और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल थे। आजादी के बाद भी संगठन ने मजदूर आंदोलन में योगदान दिया और उदारीकरण, निजीकरण तथा मजदूर एवं जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष किया।
उन्होंने केंद्र सरकार की निजीकरण संबंधी नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपने का विरोध जताया। साथ ही 44 श्रम कानूनों के स्थान पर चार श्रम संहिताएं लागू करने की प्रक्रिया को मजदूर हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि संगठन इसका विरोध कर रहा है और संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने न्यूनतम 42 हजार रुपए वेतन, 10 हजार रुपए न्यूनतम पेंशन, बोनस, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि से जुड़ी सीमाएं समाप्त करने सहित मजदूरों की विभिन्न मांगें उठाईं। महंगाई, बेरोजगारी और श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ सभी केंद्रीय श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन जारी रखने की बात भी कही।
यूनियन ने गिनाईं उपलब्धियां
बैठक में यूनियन की ओर से राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय आंदोलनों में भागीदारी के साथ कामगारों के हित में किए गए कार्यों की जानकारी दी गई। महासचिव ने बताया कि स्थायी कामगारों के लिए बनाई गई प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना के तहत वर्ष 2025-26 के लिए 21,500 रुपए का भुगतान हो चुका है। उन्होंने कहा कि जनवरी 2027 तक प्रदर्शन मूल्यांकन के आधार पर करीब 15 से 17 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान होने की संभावना है। वर्ष 2026-27 के लिए 25 हजार रुपए का भुगतान किया गया है, जबकि शेष राशि का भुगतान अगले वर्ष मूल्यांकन के बाद किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 1 नवंबर 2017 से सेवानिवृत्त हुए जिन कामगारों को ग्रेच्युटी की 20 लाख रुपए की सीमा का लाभ नहीं मिला था, उन्हें भुगतान करवाया गया। इसी तरह अक्टूबर 2025 के बाद सेवानिवृत्त हुए जिन कामगारों को 25 लाख रुपए का लाभ नहीं मिला था, उनका भुगतान भी करवाया गया। ठेका कामगारों के बच्चों को छात्रवृत्ति दिलाने, ठेका कामगारों के मूल वेतन में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी और कैंटीन भत्ते में प्रतिदिन 20 रुपए शामिल करवाने की जानकारी भी दी गई। उन्होंने बताया कि इन लाभों को आगामी ठेकों में शामिल करवाया गया है तथा 1 जून 2026 से देय बकाया राशि का भुगतान जल्द करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन ओमप्रकाश चिरानी ने किया। इस अवसर पर यूनियन सचिव बाबूलाल सैनी, विनय त्यागी, महेंद्र सिंह, घीसाराम मीणा, खुशीराम यादव, उमाशंकर, भजनलाल, सुभाष, राधाकृष्ण, हरि सिंह, राजपाल, चांद मोहम्मद, महेश, भरगड़, नेमीचंद और रोशन लाल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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