कोलसिया का वीर सपूत पंचतत्व में विलीन, सैनिक सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
6 वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि, बलवंतपुरा फाटक से निकली तिरंगा यात्रा; नम आंखों से उमड़ा जनसैलाब
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : रवींद्र पारीक
कोलसिया : झुंझुनूं जिले के कोलसिया गांव निवासी भारतीय सेना के सूबेदार राकेश कुमार दूत को गुरुवार को उनके पैतृक गांव में पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। घर से ड्यूटी पर जाते समय सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा, जहां हजारों ग्रामीणों, पूर्व सैनिकों, जनप्रतिनिधियों और सेना के जवानों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।

बलवंतपुरा फाटक से शुरू हुई तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यात्रा के दौरान “भारत माता की जय” और “वीर जवान राकेश कुमार दूत अमर रहें” के गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर पहुंचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इस मार्मिक दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

मोक्षधाम में सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया, जब सूबेदार राकेश कुमार दूत के 6 वर्षीय बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। मासूम बेटे को पिता को अंतिम विदाई देते देख उपस्थित लोग भावुक हो उठे।

सड़क हादसे में हुई थी मौत
गौरतलब है कि बुधवार देर रात झुंझुनूं जिले के बगड़ तिराहे के पास हुए सड़क हादसे में सूबेदार राकेश कुमार दूत का निधन हो गया था। वह घर से ड्यूटी पर जाने के लिए निकले थे। स्कॉर्पियो वाहन बेकाबू होकर पहले पेड़ से टकराया और फिर पलट गया। हादसे में एक अन्य युवक की भी मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जेसीबी की मदद से वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रेफर किया गया।

डूंडलोद फाटक से निकाली गई तिरंगा यात्रा
बुधवार शाम को डूंडलोद फाटक से कोलसिया तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान “भारत माता की जय” और “वीर जवान अमर रहें” जैसे नारों से पूरा रास्ता गूंज उठा। लोगों ने पुष्प अर्पित कर शहीद को अंतिम विदाई दी।
पार्थिव शरीर पहुंचते ही गमगीन हुआ माहौल
तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर बुधवार शाम, गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। सेना के वाहन से राकेश का पार्थिव शरीर घर लाया गया, जहां मां सावित्री देवी और पत्नी संजू देवी रोते-रोते बेसुध हो गई। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
गार्ड ऑफ ऑनर के बाद बेटे ने दी मुखाग्नि
गांव के मुक्तिधाम में भारतीय सेना के जवानों ने सैन्य परंपरा के अनुसार गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। विधायक विक्रम सिंह जाखल सहित सेना के अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद छह वर्षीय बेटे नितेश ने कांपते हाथों से पिता की चिता को मुखाग्नि दी, जिससे वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गई।
14 अगस्त तक की छुट्टी लेकर आए थे घर
राकेश कुमार दूत ने वर्ष 2011 में भारतीय सेना ज्वाइन की थी और फिलहाल लेह-लद्दाख में एजुकेशन हवलदार के पद पर तैनात थे। वे 23 जुलाई को छुट्टी लेकर घर आए थे और 14 अगस्त तक परिवार के साथ समय बिताने वाले थे। लेकिन मंगलवार, 4 जुलाई की देर रात बगड़ मोड़ पर उनकी स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई और पलट गई। हादसे में राकेश और उनके एक साथी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। वे सभी दिल्ली जा रहे थे।
पिता भी थे सेना में
राकेश के पिता शीशराम दूत भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके थे। अब उसी परिवार ने दूसरी पीढ़ी के सैनिक को भी तिरंगे में लिपटा हुआ अंतिम विदा दी। राकेश अपने पीछे मां सावित्री देवी, पत्नी संजू देवी और छह वर्षीय बेटे नितेश को छोड़ गए।

हादसे की जांच जारी
मृतक सैनिक के भाई नेमीचंद ने आरोप लगाया है कि दुर्घटना के दौरान स्कॉर्पियो के एयरबैग नहीं खुले, जिससे हादसा अधिक घातक साबित हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और वाहन के बेकाबू होने को हादसे का कारण माना जा रहा है।
सूबेदार राकेश कुमार दूत के असामयिक निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। अंतिम संस्कार के साथ कोलसिया का वीर सपूत पंचतत्व में विलीन हो गया। उनकी देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा को क्षेत्रवासी सदैव याद रखेंगे।


ये रहे मौजूद
इस अवसर पर नवलगढ़ विधायक विक्रम सिंह जाखल, किसान नेता कैलाश यादव, नरेंद्र कंडवाल, उपाध्यक्ष कप्तान बजरंग लाल बुरड़क, सूबेदार मेजर परमेश्वर खरबास, सूबेदार रामलाल बुरड़क, सूबेदार रिछपाल सिंह, हवलदार प्रहलाद राय आलड़िया, हवलदार वीरेंद्र दूत, सूबेदार महावीर प्रसाद, सूबेदार सुभाष चंद, हवलदार नाहर सिंह, सूबेदार रामोतार गढ़वाल, सूबेदार मेजर मामचंद दूत, सूबेदार सुमेर सिंह दूत, सूबेदार मेजर दयानंद दूत सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
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