देवास में बिजली विभाग पर हरे पेड़ों की जड़ों से कटाई का आरोप, रेंजर बोले-“हमारे साथ मिलकर चलो, बकवास मत करो”
डीएफओ ने ढाई गुना तक जुर्माने और एफआईआर के दिए निर्देश, बिजली विभाग के SE बोले-जांच के बाद होगी विभागीय कार्रवाई; मौके पर शराब की बोतलें भी मिलीं
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान/विक्रम सिंह बिजारनिया
फतेहपुर : सरकारें एक ओर ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही हैं, वहीं फतेहपुर तहसील के देवास गांव में हाईटेंशन लाइन के नीचे वन विभाग की जमीन पर हरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिजली विभाग के रोलसाबसर शाखा से जुड़े कार्मिकों ने पेड़ों की केवल ट्रिमिंग करने के बजाय उन्हें जड़ से काट दिया।

मीडिया टीम के पहुंचते ही कार्मिकों के भागने का वीडियो सुरक्षित
जब जनमानस न्यूज और टीम खोल पोल की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और काटे गए पेड़ों की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की, तो वहां मौजूद बिजली विभाग के कार्मिकों के मौके से चले जाने के दृश्य कैमरे में कैद हुए। मौके पर काटे गए पेड़ों के पास शराब की बोतलें और पार्टी में इस्तेमाल होने वाला सामान भी मिला। हालांकि शराब की बोतलें वहां किसने रखीं, इसकी पुष्टि जनमानस न्यूज नहीं करता।

हमारे साथ मिलकर चलो, बकवास मत करो-रेंजर का ऑडियो वायरल
मामले में वन विभाग का पक्ष जानने के लिए मीडिया टीम के आबिद खान दाडून्दा ने फतेहपुर रेंजर नरेंद्र सिंह से संपर्क किया। बातचीत के दौरान रेंजर द्वारा “हमारे साथ मिलकर चलो” और “बकवास मत करो” जैसे शब्द कहे जाने का ऑडियो सामने आया है। बातचीत का ऑडियो मीडिया टीम के पास सुरक्षित है और सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हो रहा है। इस बयान के बाद पेड़ों की कटाई की कार्रवाई और विभागीय भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रिमिंग की जगह पेड़ जड़ से काटने पर सवाल
बिजली लाइनों के आसपास पेड़ों की शाखाओं की ट्रिमिंग को लेकर विभागीय दिशा-निर्देश होने के बावजूद देवास में पेड़ों को जड़ से काटे जाने का आरोप है। सवाल यह है कि यदि लाइन के लिए पेड़ बाधा बन रहे थे तो नियमानुसार ट्रिमिंग क्यों नहीं की गई और हरे पेड़ों को पूरी तरह क्यों काटा गया?

यह पहली बार नहीं है जब फतेहपुर में बिजली लाइनों के नाम पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया हो। वर्ष 2022 में भी नेशनल हाईवे-11 पर करीब 20 हरे पेड़ों की कटाई का मामला मीडिया में उठा था। उस मामले में वन विभाग की कार्रवाई और बाद में मीडिया पर दर्ज मुकदमे को लेकर भी विवाद हुआ था। मीडिया टीम के अनुसार उस प्रकरण में आबिद खान कानूनी रूप से बरी हुए।
अधिकारियों ने क्या कहा?
प्रदीप कुमार, डीएफओ सीकर ने बताया कि उनके संज्ञान में हरे पेड़ बिजली विभाग द्वारा काटे जाने का मामला आया है। उनके अनुसार नई गाइडलाइन के तहत पेड़ की मार्केट वैल्यू का दो से ढाई गुना तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है। उन्होंने टीम को एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही।
सुभाष देवंदा, अधीक्षण अभियंता (SE), बिजली विभाग सीकर ने कहा कि पेड़ काटना गंभीर मामला है और विभागीय गाइडलाइन में ट्रिमिंग की अनुमति है। यदि कर्मचारियों द्वारा पेड़ काटे गए हैं तो निष्पक्ष जांच कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो सबूतों के साथ कार्रवाई की मांग
मीडिया टीम के आबिद खान का कहना है कि कटे हुए पेड़ों के वीडियो उनके पास सुरक्षित हैं। अब देखना होगा कि वन विभाग और बिजली विभाग इस मामले में कितनी निष्पक्ष कार्रवाई करते हैं। पेड़ों की कटाई को लेकर जिम्मेदारी तय होने और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होने तक मामले को प्रमुखता से उठाया जाता रहेगा। सवाल यही है-पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियम जमीन पर लागू होंगे या फिर मामला सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा?
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