नीमकाथाना में प्रसूता की मौत, दूसरे दिन भी धरना जारी:जांच के लिए दो कमेटियों का गठन, तीन दिन में मांग रिपोर्ट; परिजन तीन मांगों पर अड़े
नीमकाथाना में प्रसूता की मौत, दूसरे दिन भी धरना जारी:जांच के लिए दो कमेटियों का गठन, तीन दिन में मांग रिपोर्ट; परिजन तीन मांगों पर अड़े
नीमकाथाना : नीमकाथाना के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में प्रसूता अंजली सैनी की मौत के मामले में दूसरे दिन शुक्रवार को भी अस्पताल के बाहर परिजनों और ग्रामीणों का धरना जारी रहा। प्रशासन और प्रतिनिधिमंडल के बीच चार दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। परिजन अपनी तीन प्रमुख मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। निष्पक्ष जांच के लिए स्थानीय स्तर पर 6 सदस्यीय और जयपुर जोन स्तर पर 3 सदस्यीय अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया गया है। दोनों समितियों को तीन दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल सिंह शेखावत ने बताया- प्रसूता अंजली सैनी की मौत के मामले में गठित 6 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष मातृ एवं शिशु चिकित्सालय के प्रभारी एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गोविंद सिंह चौपड़ा होंगे। समिति में डॉ. नंद किशोर अग्रवाल, डॉ. विश्व प्रकाश यादव, डॉ. आशाराम खंडेला, डॉ. बबीता महला तथा नर्सिंग अधीक्षक बजरंग लाल शर्मा को सदस्य बनाया गया है।
वहीं, जयपुर जोन के संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं ने भी 3 सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इसकी अध्यक्षता जिला अस्पताल लक्ष्मणगढ़ के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. अचल भास्कर करेंगे।

समिति में खंडेला उप जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका और फिजिशियन डॉ. महेश सदस्य होंगे। समिति को तीन दिन में तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नीमकाथाना उप जिला अस्पताल को उपचार से जुड़े सभी दस्तावेज जांच समिति को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
ये है मामला
अंजली सैनी (25) को 12 जुलाई को मातृ एवं शिशु अस्पतला में भर्ती कराया गया था। 14 जुलाई को सिजेरियन प्रसव के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे जयपुर रेफर किया गया, जहां 15 जुलाई की रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर्स पर लापरवाही, समय पर ब्लड नहीं चढ़ाने और सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराने के आरोप लगाए हैं।
वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज एनीमिया से पीड़ित थी और प्रसव के बाद ब्लीडिंग नियंत्रित नहीं होने पर उसे उच्च केंद्र रेफर किया गया था। फिलहाल, अस्पताल के बाहर धरना जारी है और प्रशासन समाधान निकालने के प्रयास में जुटा हुआ है।
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