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समान नागरिक संहिता पर जनसुनवाई: धार्मिक, सामाजिक और विधि विशेषज्ञों ने दिए सुझाव


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समान नागरिक संहिता पर जनसुनवाई: धार्मिक, सामाजिक और विधि विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

समान नागरिक संहिता पर जनसुनवाई: धार्मिक, सामाजिक और विधि विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

झुंझुनूं : राजस्थान समान नागरिकता संहिता (द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड-2026) के संबंध में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में संभाग स्तरीय जनसुनवाई का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जनसुनवाई में विभिन्न धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, कानून एवं विधि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों व आमजन ने भाग लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम दो सत्रों में प्रातः 10 बजे से 12:30 बजे तथा दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित हुआ।

जिला कलेक्टर डॉ अरुण गर्ग ने बताया कि जनसुनवाई में लोहार्गल महंत स्वामी अवधेशाचार्य, शिक्षाविद् प्यारेलाल ढूकिया, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रतन कुमार मोरवाल, अधिवक्ता मोहम्मद बिलाल कुरैशी, मनीष अग्रवाल, कमल कान्त शर्मा, मोहम्मद इब्राहीम खान, संजय मोरवाल, महिपाल पूनियां, जाहीद अली खोखर सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे।

महंत स्वामी अवधेशाचार्य ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं सम्मान प्राप्त होगा। शिक्षाविद् प्यारेलाल ढूकिया व संजय मोरवाल ने महिलाओं को समान अधिकार मिलने की दृष्टि से इसे महत्वपूर्ण बताया। मनीष अग्रवाल ने समान नागरिक संहिता का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि इसके लागू होने से सभी समुदायों को लाभ मिलेगा।

कमलकान्त शर्मा ने सुझाव दिया कि लिव-इन रिलेशनशिप को संहिता में शामिल नहीं किया जाए, अथवा यदि शामिल किया जाए तो उसके लिए सख्त कानूनी प्रावधान बनाए जाएं। मोहम्मद इब्राहीम खान ने सभी नागरिकों के लिए समान चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया।

अधिवक्ता मोहम्मद बिलाल कुरैशी ने संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म का पालन, आचरण एवं प्रचार प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। उन्होंने निकाह, मेहर, तलाक, उत्तराधिकार और वसीयत जैसे विषयों को धार्मिक आस्था से जुड़ा बताते हुए इन मामलों में धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान बनाए रखने की बात कही।

कॉमरेड महिपाल पूनियां ने कहा कि सभी नागरिकों को समानता का अधिकार पहले से प्राप्त है तथा राजस्थान जैसे विविध सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं वाले प्रदेश में विभिन्न समुदायों की अलग-अलग रीति-रिवाजों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। वहीं जाहीद अली खोखर ने सुझाव दिया कि यदि समान नागरिक संहिता लागू की जाए तो किसी धर्म विशेष को लक्ष्य बनाकर नहीं, बल्कि सभी के लिए समान रूप से लागू की जाए।

सुझाव देने के लिए https://ucc.rajasthan.gov.in⁠ पोर्टल शुरू किया है। नागरिक व्यक्तिगत रूप से या किसी संस्था एवं संगठन की ओर से भी सुझाव दे सकते हैं।

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