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श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव


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श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : शैलेंद्र पारीक

नवलगढ़ : श्रीराम मंदिर मोर क्षेत्र स्थित श्रीआनंदम परिसर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कथा का वाचन प्रख्यात कथाव्यास आचार्य नीरज शौनक के सानिध्य में किया जा रहा है।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया, जिससे कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। आचार्य श्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार धर्म की रक्षा और मानवता को सही मार्ग दिखाने के लिए हुआ था। उन्होंने बताया कि धैर्य, प्रेम और नीति के साथ जीवन जीना ही श्रीकृष्ण के संदेशों का सार है।

चतुर्थ दिवस की कथा में अजामिल चरित्र, नारायण कवच, नरसिंह अवतार, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार, सूर्यवंश एवं भगवान राम के अवतार सहित विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा में बताया गया कि भगवान का स्मरण मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी शक्ति प्रदान करता है तथा सच्ची भक्ति से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।

समुद्र मंथन प्रसंग में धर्म की विजय का संदेश दिया गया, वहीं गजेंद्र मोक्ष कथा के माध्यम से ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का महत्व बताया गया। नरसिंह अवतार प्रसंग में भक्त प्रहलाद की भक्ति और भगवान द्वारा भक्त रक्षा का भावपूर्ण वर्णन किया गया।

कथा के दौरान कृष्ण-बलराम, यशोदा और वासुदेव की आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भजन-संगीत और भक्तिमय वातावरण से पूरा परिसर गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में डूबकर कथा का श्रवण किया। श्री सूर्यनारायण मठ लोहार्गल धाम के महंत स्वामी अवधेशाचार्यजी महाराज ने आशीर्वचन देते हुए सनातन संस्कृति से जुड़ने और स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया। कथा के दौरान संतों एवं अतिथियों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में राजेश अग्रवाल सपत्नीक यजमान रहे। कथा के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

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