पशु सखी बनकर गोपाला स्वामी ने बदली अपनी तकदीर, अब गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
पशु सखी बनकर गोपाला स्वामी ने बदली अपनी तकदीर, अब गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के संकल्पित प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा राजीविका के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने व महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चलाए जा रहे अभियान से हजारों महिलाओं के जीवन में बदलाव आया है। इन सकारात्मक प्रयासों का ही एक उदाहरण है, चूरू जिले के सरदारशहर ब्लॉक के चेतना सीएलएफ के बालाजी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी पशु सखी गोपाला स्वामी, जिनके जीवन में राजीविका से जुड़ने के बाद अभूतपूर्व बदलाव हुए हैं।
एक मध्यमवर्गीय ग्रामीण परिवार से संबंध रखने वाली गोपाला स्वामी ने वर्ष – 2021 में राजीविका से जुड़कर नियमित बचत व समूह गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया। पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। पशुपालन कार्य करने के बावजूद वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में उन्हें पर्याप्त आय नहीं मिल पा रही थी। फिर उन्हें राजीविका के माध्यम से उन्हें “पशु सखी” के रूप में प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पशु पोषण, बधियाकरण, पशु आवास व प्रबंधन और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी प्रदान की गई। साथ ही ऋण सुविधा उपलब्ध कराकर उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहयोग मिला। पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर गोपाला स्वामी ने अपने पशुपालन कार्य को नई दिशा दी।
आज वे गांव की महिलाओं को पशुपालन से जुड़ी जानकारी प्रदान कर रही हैं तथा पशुओं के उपचार एवं देखभाल के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की मदद भी कर रही हैं। गोपाला स्वामी वर्तमान में दुग्ध उत्पादन, गोबर के उपले और केंचुआ खाद जैसे उत्पादों से प्रतिमाह लगभग 8 से 10 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है तथा उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
गोपाला स्वामी अब गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी सफलता को देखकर कई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। गोपाला स्वामी सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाई जा रही योजनाओं और राजीविका के सहयोग ने उन्हें नई पहचान दी है। भविष्य में वे अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार कर गांव में पशुपालन व्यवसाय को और अधिक विकसित करना चाहती है।
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