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चूरू एकता मंच ने चूरू का स्थापना दिवस मनाया


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चूरू एकता मंच ने चूरू का स्थापना दिवस मनाया

चूहरू जाट हिन्दी फीचर फिल्म बनाने की घोषणा करने पर निर्माता निर्देशक राजेन्द्र सिंह शेखावत का सम्मान किया

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : जिला मुख्यालय पर एकता मंच ने आज चूरू का स्थापना दिवस मनाया। नगर श्री शोध संस्थान चूरू में विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और समाज के सभी वर्गों के लोगों ने चूरू का स्थापना दिवस मनाया।संस्थापक चूहरू जाट की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम प्रारंभ किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पार्षद जगदीश मेघवाल ने बताया कि चूहरू ने पहले ढाणी बनाई फिर उसका नाम कालेरा बास हुआ और सन 1620 में शहर का नाम चूहरू के नाम पर चूरू हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पत्रकार, लेखक और फ़िल्म निर्देशक राजेन्द्र सिंह शेखावत ने चूरू संस्थापक के नाम पर चूहरू जाट हिन्दी फीचर फिल्म बनाने की घोषणा करते हुए बताया कि चूहरू जाट का व्यक्तित्व एतिहासिक है। फ़िल्म में चूरू की संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।

इस अवसर पर राजेंद्र सिंह शेखावत को चूहरू जाट फिल्म निर्माण के लिए मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। विशिष्ट अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता दीपिका शर्मा ने चूहरू जाट को नमन करते हुए लोक संस्कृति और लोक गीतों का महत्व बताकर लोक गीत सुनाया। विशिष्ट अतिथि जिला उप प्रमुख महेन्द्र न्योल ने बताया कि चूरू शहर ऐतिहासिक हवेलियों का शहर है। चूरू को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित करने के लिए मिलकर प्रयास करेंगे।

मुख्य वक्ता दलीप सरावग ने चूरू संस्थापक चूहरू जाट को याद करते हुए बताया कि मुरलीधर सारस्वत ने चूरू इतिहास में लिखा है कि चूरू कम से कम छः सौ – सात सौ वर्ष पुराना है। चूरु को बसाने वाले चूहरू ही थे। पूरी तरह आबाद होने से पहले यह स्थान चूहरू की ढाणी के नाम से ही जाना जाता था। उनके पास अपार पशु धन था। वे मूलत: नागौर के निवासी थे। उनका विवाह खासोली के एक जाट परिवार में हुआ था।यह तथ्य भली प्रकार हृदयंगम कर चुका था कि बस्ती के विकास के लिए यह परम आवश्यक है कि त्यागी ब्राह्मण और कृषि और व्यापार कुशल वैश्य ससम्मान बसाए जाएं। इन दोनों जातियों का संयुक्त शक्तित्व छप्पर फाड़ कर धन की वर्षा कर लेने की क्षमता रखता है। प्रचुर भूमि की प्राप्ति, समुचित प्रतिष्ठा और पानी की सुविधा से आकर्षित होकर इस बस्ती में वैश्यों के अनेक घराने आए।

उपस्थित लोगों ने सर्वसम्मति से चूरू संस्थापक की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव रखा। इस अवसर पर लक्ष्मीकांत शर्मा, विकास मील, भानूप्रकाश सेवदा, प्रताप सिंह, राकेश वर्मा, कपिल चंदेल, बंसी पवार, श्रवण सैनी, मुरारी लाल टाइवाला, कैलाश पारीक, शीतल सोनी, सुरेंद्र पिपलवा, आकाश ओझा, राजेश चौधरी,अंजू नेहरा, रणजीत कस्वा, सरफराज खान, आनंद जोशी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संयोजक विनोद राठी ने किया

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