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सीकर डेयरी MD पर फर्जी भर्ती-घी घोटाले का आरोप:5 करोड़ के टेंडर का विवाद भी; जोधपुर डेयरी अध्यक्ष ने की निलंबन की मांग


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सीकर डेयरी MD पर फर्जी भर्ती-घी घोटाले का आरोप:5 करोड़ के टेंडर का विवाद भी; जोधपुर डेयरी अध्यक्ष ने की निलंबन की मांग

सीकर डेयरी MD पर फर्जी भर्ती-घी घोटाले का आरोप:5 करोड़ के टेंडर का विवाद भी; जोधपुर डेयरी अध्यक्ष ने की निलंबन की मांग

जोधपुर : राजस्थान के सहकारी दुग्ध तंत्र और सीकर डेयरी में प्रबंध स्तर की कार्यप्रणाली को लेकर एक और बड़ा विवाद सामने आया है। पश्चिमी राजस्थान दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि. जोधपुर के अध्यक्ष रामलाल विश्नोई ने मुख्यमंत्री को एक तथ्यात्मक ज्ञापन भेजा है।

इसमें सीकर जिला दुग्ध संघ के वर्तमान प्रबंध संचालक (MD) एल.सी. बलाई पर फर्जी भर्ती, घी घोटालों और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए उनके तत्काल निलंबन की मांग की गई है। विश्नोई के अनुसार बलाई के खिलाफ सहकारिता विभाग से लेकर एसओजी तक जांच लंबित है।

5 करोड़ के टेंडर और रिटायरमेंट का दबाव

सबसे बड़ी चिंता सीकर डेयरी में हाल ही में जारी टेंडरों को लेकर है। सीकर संघ की ओर से 10 मार्च को जारी ई-निविदा सूचना के अनुसार, बलाई के कार्यकाल में 4 करोड़ रुपए सुरक्षा व्यवस्था, 25 लाख रुपए ईटीपी प्लांट और अन्य लाखों के टेंडर निकाले गए हैं। इन करीब 5 करोड़ रुपए के टेंडरों की प्रक्रिया 10 अप्रैल को पूरी होनी थी।

विश्नोई ने आशंका जताई है कि इससे संघ को भारी नुकसान हो सकता है। ज्ञापन में बताया गया है कि बलाई दिसंबर 2026 में सेवानिवृत्त (रिटायर) होने वाले हैं। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ये मामले बिना निष्कर्ष के समाप्त हो सकते हैं।

नियम विरुद्ध नियुक्ति और 2005-2013 का घी घोटाला

विश्नोई का आरोप है कि एल.सी. बलाई मूल रूप से हनुमानगढ़ दुग्ध संघ के कर्मचारी हैं। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) को उनका ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं था, फिर भी 2013 में उन्हें सीकर डेयरी का एमडी बना दिया गया।

उनके वर्ष 2005 से 2013 तक के कार्यकाल में फर्जी बिलों के बिना शुद्ध घी के अनियमित रूप से बाहर जाने और दुग्ध समितियों को देय राशि से अधिक भुगतान का मामला सामने आया था। इस पर 29 नवंबर 2013 को उन्हें आरोप-पत्र थमाया गया था।

रजिस्ट्रार सहकारिता के 30 नवंबर 2025 के रिमांड आदेश के बाद इस प्रकरण में धारा-55 के तहत साल 2005 से 2013 की अवधि के लिए दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं।

कोटा फर्म को टेंडर: खराब घी बाजार में बांटा

बलाई के खिलाफ एक और गंभीर मामला कोटा की फर्म मैसर्स शिव हैल्थ फूड एल.एल.पी. से जुड़ा है। आरसीडीएफ के रिकॉर्ड के अनुसार- इस फर्म को घी बनाने का टेंडर दिया गया था लेकिन फर्म की ओर से निर्मित घी खराब पाया गया और उसे बाजार में वितरित कर दिया गया।

इसकी जांच के बाद 7 सितंबर 2020 को तत्कालीन महाप्रबंधक (डीपीएम) एल.सी. बलाई के खिलाफ राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम की धारा-57 के तहत वसूली की कार्यवाही का निर्णय लिया गया था। वर्तमान में इस वसूली पर हाईकोर्ट से स्टे आदेश है।

2021-22 की भर्ती में कूटरचना और निलंबन

विवाद का सबसे नया पहलू साल 2021-22 में राजस्थान सहकारी भर्ती बोर्ड के माध्यम से हुई भर्तियों में फर्जीवाड़े से जुड़ा है। दस्तावेजों के पुनः सत्यापन में अनुभव और शैक्षणिक योग्यता के कूटरचित दस्तावेज सामने आए थे।

आरसीडीएफ की जांच कमेटी ने दीपेश लांबा (सहायक प्रबंधक) के चयन को त्रुटिपूर्ण माना और तत्कालीन महाप्रबंधक (कार्मिक एवं प्रशासन) एल.सी. बलाई को ‘पर्यवेक्षणीय लापरवाही’ का दोषी माना। इसके चलते 21 नवंबर 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

डिवीजन बेंच के आदेश से खुली अनुशासनात्मक कार्रवाई की राह

एल.सी. बलाई के 21 नवंबर 2025 के निलंबन आदेश को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने इस तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया था कि निलंबन का अधिकार ‘एमडी’ के बजाय ‘बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स’ के पास है। इसके बाद आरसीडीएफ ने इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की।

13 मार्च को डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया कि ‘सक्षम प्राधिकारी’ कानून के अनुसार बलाई के खिलाफ नए सिरे से आदेश पारित करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। सबसे अहम बात यह रही कि कोर्ट ने विभाग को खुली छूट दी कि नई अनुशासनात्मक कार्रवाई करते समय वह सिंगल जज द्वारा मेरिट्स पर की गई किसी भी टिप्पणी से बिल्कुल प्रभावित न हो। कोर्ट से यह रास्ता साफ होने के बाद ही अब विश्नोई ने सरकार से बलाई को तत्काल निलंबित करने की मांग तेज कर दी है।

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