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झुंझुनूं में सोलर से 2.75 करोड़ यूनिट बिजली का प्रोडक्शन:जिले के 7 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं ​का लाइट बिल जीरो, प्रदेश में लागू होगा मॉडल


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झुंझुनूं में सोलर से 2.75 करोड़ यूनिट बिजली का प्रोडक्शन:जिले के 7 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं ​का लाइट बिल जीरो, प्रदेश में लागू होगा मॉडल

झुंझुनूं में सोलर से 2.75 करोड़ यूनिट बिजली का प्रोडक्शन:जिले के 7 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं ​का लाइट बिल जीरो, प्रदेश में लागू होगा मॉडल

झुंझुनूं : झुंझुनूं सोलर एनर्जी में आगे बढ़ रहा है। जिले में 2.75 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन कर रहे है। इतना ही नहीं 7 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं के बिजली बिल भी जीरो आ रहा है। इसे लेकर 10 दिन पहले ही ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने जिले की तारीफ करते हुए ये भी कहा था- सौर ऊर्जा उत्पादन में झुंझुनूं राजस्थान का ‘सिरमौर’ बन चुका है। अब यहां के मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। कुसुम योजना (A और C) में किसान अपनी बंजर जमीन पर सोलर पैनल लगाकर हर महीने एक्स्ट्रा इनकम भी ले रहे है।

7400 घरों का बिजली बिल हुआ ‘जीरो’

पीएम सूर्यघर योजना ने मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत दी है। जिले के लगभग 7400 घरों की छतों पर सोलर पैनल लग चुके हैं, जिससे इन परिवारों का बिजली बिल अब शून्य आता है। इसके अलावा, उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली डिस्कॉम को बेचकर आर्थिक लाभ भी कमा रहे हैं। जिले में अब तक 55 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है, जिसने इस अभियान को नई गति दी है।

आंकड़ों में समझे सौर ऊर्जा से कितना उत्पादन

कुसुम ‘ए’ योजना 34 प्लांट से 37 मेगावाट उत्पादन
कुसुम ‘सी’ योजना 12 प्लांट से 35 मेगावाट उत्पादन
हर महीने उत्पादन 2.75 करोड़ यूनिट
क्षमता 110 मेगावाट (बायोमास सहित)
पीएम सूर्यघर लाभार्थी 8100 से ज्यादा परिवार
कुल उपभोक्ता 6 लाख (4.75 लाख घरेलू)
टारगेट 600-700 मेगावाट

झुंझुनूं मॉडल बनेगा प्रदेश का चेहरा

ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने अपने दौरे के दौरान कहा कि झुंझुनूं ने सौर ऊर्जा को जिस तरह जन-आंदोलन बनाया है, वह काबिले तारीफ है। अजमेर डिस्कॉम में झुंझुनूं का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है। सरकार अब झुंझुनूं के इस ‘सक्सेस मॉडल’ का अध्ययन कर इसे राजस्थान के अन्य जिलों में ब्लूप्रिंट की तरह इस्तेमाल करेगी।

बैटरी बैकअप सिस्टम पर होगा काम

सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी सीमा ‘रात का अंधेरा’ है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार अब बैटरी बैकअप सिस्टम पर काम कर रही है। यदि जिले की कुल क्षमता 700 मेगावाट तक पहुंच जाती है, तो झुंझुनूं को बाहरी ग्रिड से बिजली खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

अधीक्षण अभियंता, झुंझुनूं महेश कुमार टीबड़ा ने बताया कि कुसुम और पीएम सूर्यघर योजनाओं के प्रति जनता का उत्साह अद्भुत है। वर्तमान में हम पौने तीन करोड़ यूनिट प्रतिमाह उत्पादन कर रहे हैं। वह दिन दूर नहीं जब झुंझुनूं ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर होगा।

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