होटल संचालक से कथित मारपीट और रिश्वत मांगने का आरोप, एसपी कार्यालय पर प्रदर्शन
ग्रामीणों और सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने सौंपा ज्ञापन, सोमवार तक निष्पक्ष जांच की प्रगति नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : राष्ट्रीय राजमार्ग-52 के बाईपास क्षेत्र में होटल संचालक दीपचंद पूनिया के साथ कथित मारपीट, अवैध वसूली की मांग और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को पीड़ित के समर्थन में आसपास के गांवों के ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया। प्रतिनिधिमंडल ने एसपी और जिला कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई तथा निष्पक्ष जांच की मांग की।
पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप, कार्रवाई की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र बाबल ने कहा कि यदि किसी व्यापारी के साथ वर्दी की आड़ में मारपीट और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है, तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि पीड़ित को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होने तक संघर्ष जारी रखा जाएगा।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के नेता दिवेश चौधरी ने आरोप लगाया कि होटल संचालन के बदले 10 हजार रुपए प्रतिमाह देने की मांग की गई और ऐसा नहीं करने पर नशीला पदार्थ रखकर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि यदि सोमवार तक जांच की प्रगति स्पष्ट नहीं हुई और उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी की ओर से बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।
यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष आसिफ खान ने कहा कि स्थानीय व्यापारियों और युवाओं के अधिकारों से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने हिरासत के दौरान मारपीट और पुलिसकर्मियों के कथित नशे में होने के आरोपों को गंभीर बताते हुए स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने की मांग की। उन्होंने ड्यूटी रिकॉर्ड, चिकित्सकीय दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की भी मांग उठाई।

क्या है पूरा मामला?
परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, 7 अक्टूबर की तड़के करीब 2:30 बजे पुलिसकर्मी होटल पहुंचे और दीपचंद पूनिया को अपने साथ ले गए। आरोप है कि इससे पहले दीपचंद चेकिंग पॉइंट पर तैनात पुलिसकर्मियों का वीडियो बना रहे थे। परिजनों का दावा है कि इसी बात से नाराज होकर उन्हें हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में लेने के संबंध में उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई और थाने पहुंचने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
इसके अलावा, होटल संचालन के बदले 10 हजार रुपए प्रतिमाह कथित तौर पर मांगने और इनकार करने पर नशीला पदार्थ रखकर एनडीपीएस अधिनियम के तहत झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सोमवार तक जांच की प्रगति बताने की मांग
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन को सोमवार तक निष्पक्ष जांच की प्रगति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन और जिला स्तरीय आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, पुलिस अधीक्षक ने मामले के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कराने का आश्वासन दिया है। अब मामले में पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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