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खेतड़ीनगर में हिंदी कार्यशाला, राजभाषा के महत्व पर चर्चा:केसीसी प्रोजेक्ट के सौजन्य से आयोजित, चुनौतियों पर भी हुई बात


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खेतड़ीनगर में हिंदी कार्यशाला, राजभाषा के महत्व पर चर्चा:केसीसी प्रोजेक्ट के सौजन्य से आयोजित, चुनौतियों पर भी हुई बात

खेतड़ीनगर में हिंदी कार्यशाला, राजभाषा के महत्व पर चर्चा:केसीसी प्रोजेक्ट के सौजन्य से आयोजित, चुनौतियों पर भी हुई बात

खेतड़ीनगर : खेतड़ीनगर में केसीसी प्रोजेक्ट के हिंदी पखवाड़े के तहत गुरुवार को एक कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला केसीसी प्रशासन भवन के सभागार कक्ष में हुई। इसमें राजभाषा हिंदी के महत्व और चुनौतियों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम के खास मेहमान केसीसी के कार्यकारी निदेशक पुरुषोत्तमदास बोहरा थे। कमलेश कुमार ने इसकी अध्यक्षता की। अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नत्थूराम मुक्कड़ खास मेहमान और मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद थे।

पुरुषोत्तमदास बोहरा ने कहा कि हिंदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसके इस्तेमाल में झिझक, तकनीकी शब्दों की दिक्कत और अंग्रेजी पर बढ़ती निर्भरता है। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते असर के बीच हिंदी को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना जरूरी है।

बोहरा ने बताया कि कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट पर हिंदी में काम करने के लिए जो सुविधाएं उपलब्ध हैं, उनका ज्यादा इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ हिंदी को तकनीक से जोड़ना बहुत जरूरी है।

मुख्य वक्ता नत्थूराम मुक्कड़ ने बताया कि हिंदी सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को जोड़ने वाली एक अहम भाषा है। उन्होंने कहा कि सरकारी कामों में राजभाषा हिंदी का ज्यादा इस्तेमाल करने से कामकाज आम लोगों के लिए आसान और सहज हो जाएगा।

मुक्कड़ ने यह भी कहा कि आजकल हिंदी का रूप तेजी से बदल रहा है। सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाओं की वजह से हिंदी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर बढ़ा है। ऐसे में हिंदी को सिर्फ औपचारिक भाषा तक सीमित न रखकर, इसे सरकारी काम, शिक्षा, तकनीक और जनसंचार के क्षेत्र में प्रभावी ढंग से अपनाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि राजभाषा के प्रति सम्मान तभी सही मायने में सफल होगा।

इस मौके पर विनायक साहू, देवेंद्र वर्मा, हरिचरण, मुन्नालाल जेदिया, आनंद पांडे, अंबेश गोविंद, रेनू खेदड़, प्रिया दीक्षित, अशोक कुमार, शेरसिंह निर्वाण, लालूप्रसाद छाबड़ी, अनूप सिंह, बाबूलाल सैनी, विकास धनखड़, प्रदीप कुमार, कमलेश दुबे, लक्ष्मी देवी समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यशाला में हिस्सा लिया।

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