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“संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा: AIMPLB


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“संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा: AIMPLB

“संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा: AIMPLB

नई दिल्ली : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन और धरने के लिए अनुमति देने से दिल्ली पुलिस द्वारा अंतिम समय में इनकार किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसकी कड़ी निंदा की। बोर्ड ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों के मौलिक संवैधानिक अधिकार हैं और प्रशासनिक निर्णयों के माध्यम से इन पर अंकुश नहीं लगाया जाना चाहिए।

AIMPLB के प्रवक्ता और “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान के संयोजक डॉ. सैयद क़ासिम रसूल इलियास ने पिछले दस दिनों के दौरान तीन बार पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन का दौरा किया और थाना प्रभारी (SHO) तथा पुलिस उपायुक्त (DCP) को आश्वासन दिया कि धरने में शामिल होने वाले लोगों की संख्या निर्धारित सीमा के भीतर रहेगी। इन आश्वासनों के बावजूद, निर्धारित कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले यह कहते हुए धरने की अनुमति वापस ले ली गई कि पुलिस को बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की आशंका है।

बोर्ड ने इस निर्णय को एकतरफा और अनुचित बताया तथा कहा कि वह पहले भी निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन करते हुए जंतर-मंतर पर कई शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित कर चुका है।

बोर्ड ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित धरना उसके राष्ट्रव्यापी “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान का पहला चरण था। इस अभियान का उद्देश्य समाज के वंचित और हाशिए पर पड़े वर्गों तथा अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों, के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन; भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं; जीवन, संपत्ति, गरिमा और सम्मान पर हमलों; मस्जिदों, मदरसों और मुस्लिम बस्तियों के विरुद्ध बुलडोज़र कार्रवाई; धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध; मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा; समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयासों; तथा वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने के प्रयासों जैसे मुद्दों की ओर जनता का ध्यान आकर्षित करना है।

बोर्ड ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा वर्ष 2029 तक भाजपा-शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने संबंधी बयान ने भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। मुसलमान मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा को अपने धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा मानते हैं। भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और भाषाओं वाला देश है तथा संविधान इस विविधता को संरक्षण प्रदान करता है। बोर्ड ने कहा कि इस विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली कोई भी नीति गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े करती है।

बोर्ड ने वंदे मातरम् के सभी अंतरों को अनिवार्य बनाने के प्रयासों पर भी आपत्ति जताई। उसने कहा कि देशभक्ति व्यक्त करने के साधन के रूप में किसी विशेष गीत के पूर्ण गायन को अनिवार्य बनाना धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।
देश की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक स्थिति का उल्लेख करते हुए बोर्ड ने कहा कि गरीबी, महँगाई, बेरोज़गारी, किसानों की समस्याओं और महिलाओं के विरुद्ध अपराध जैसे मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे समय में जनता का ध्यान इन बुनियादी मुद्दों से हटाकर धार्मिक और सांप्रदायिक मामलों की ओर मोड़ना राष्ट्रीय हित में नहीं है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान का उद्देश्य नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करना तथा देश में न्याय, स्वतंत्रता, समानता, मानवीय गरिमा और बंधुत्व का वातावरण मजबूत करना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति से इनकार के बावजूद राष्ट्रव्यापी अभियान अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को निम्नलिखित वक्ताओं ने संबोधित किया

मौलाना ओबैदुल्लाह खान आज़मी, उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड,  मलिक मोतसिम खान, उपाध्यक्ष, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, मौलाना असगर अली इमाम महदी सलाफी, उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा अमीर, जमीयत अहले हदीस, मौलाना मुहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी, महासचिव, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मौलाना मुहम्मद उमरैन महफ़ूज़ रहमानी, सचिव, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी, महासचिव, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास, प्रवक्ता, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा संयोजक, “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान ।

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