लक्ष्मणगढ़ में शिक्षकों का दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन:2500 शिक्षक पहुंचे, राष्ट्रीय संगठन मंत्री बोले- तरक्की का रास्ता स्कूलों से होकर गुजरता है
लक्ष्मणगढ़ में शिक्षकों का दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन:2500 शिक्षक पहुंचे, राष्ट्रीय संगठन मंत्री बोले- तरक्की का रास्ता स्कूलों से होकर गुजरता है
लक्ष्मणगढ़ : लक्ष्मणगढ़ में शुक्रवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) राजस्थान का दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन शुरू हुआ। इस सम्मेलन में जिले के सभी खंडों से करीब 2500 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हिस्सा लिया। शिक्षकों की बड़ी संख्या के कारण यह आयोजन शिक्षा, संस्कार और संगठन शक्ति का संगम दिखा।
कार्यक्रम की शुरुआत बुधगिरी मढ़ी फतेहपुर के पीठाधीश्वर दिनेशगिरि महाराज की मौजूदगी में दीप जलाकर और सरस्वती वंदना के साथ हुई। सम्मेलन के संयोजक और नेछवा खंड अध्यक्ष ताराचंद दुल्लड़ ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा- ये आयोजन शिक्षकों के विचार-विमर्श, अनुभव बांटने और संगठनात्मक संकल्प का मौका है।

दिनेशगिरि महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक सिर्फ ज्ञान देने वाला नहीं होता, बल्कि वो चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने वाला भी है। उन्होंने कहा कि भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने का सपना शिक्षक ही पूरा कर सकते हैं।
‘देश की तरक्की का रास्ता स्कूलों से होकर गुजरता है’
महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता थे। उन्होंने अपने भाषण में कहा, “शिक्षक मतलब समाधान है।” उन्होंने कहा कि गुरु सिर्फ वेतन पाने वाले कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वे भारत की गौरवशाली परंपरा और राष्ट्रीय चेतना को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की का रास्ता स्कूलों से होकर गुजरता है और शिक्षक इस रास्ते के सबसे मजबूत निर्माता हैं।

उन्होंने शिक्षकों से शिक्षा की गुणवत्ता, संगठन की मजबूती और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ काम करने को कहा। उन्होंने ये भी बताया कि प्रार्थना सभा छात्रों में संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम जगाने का एक अच्छा तरीका है।
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी किरण सैनी ने कहा- अच्छी शिक्षा, नए तरीके और समय के हिसाब से पढ़ाई की तकनीकें आज के समय की जरूरत हैं। उन्होंने शिक्षकों से लगातार नए तरीके अपनाने और पढ़ाई के काम को और असरदार बनाने की अपील की।

प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संपत सिंह ने बताया- समाज ने शिक्षकों को भगवान जैसा दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि छात्र के खाली दिमाग पर क्या लिखा जाएगा, ये शिक्षक के नजरिए और व्यक्तित्व पर निर्भर करता है। उन्होंने ये भी कहा कि महासंघ हमेशा राष्ट्रीय भावना के साथ काम करता आया है और आगे भी इसी भावना से काम करता रहेगा।
जिला अध्यक्ष कल्याण सिंह कस्वां ने कहा- शिक्षक सम्मेलन अवकाश नहीं, बल्कि संवाद, चिंतन और नवाचार का पर्व है। उन्होंने सम्मेलन को ज्ञान, संवाद और संगठन शक्ति का महाकुंभ बताते हुए सभी शिक्षक साथियों से संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया।

अतिरिक्त जिला मंत्री सनत कुमार शर्मा ने संगठन का वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रदेश में सर्वाधिक सदस्यता प्राप्त करने पर धोद खंड अध्यक्ष कैलाश कविया एवं खंड मंत्री सुधीर पाराशर का मंच से सम्मान किया गया।
सम्मेलन के सह संयोजक एवं लक्ष्मणगढ़ खंड अध्यक्ष ओमप्रकाश भास्कर ने आयोजन की व्यवस्थाओं का सफल संचालन करते हुए सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन संभाग संयुक्त मंत्री यशवंत सिंह एवं जिला कोषाध्यक्ष बिहारी सिंह कविया ने किया।

समारोह के अंत में अतिथियों का सम्मान किया गया। शिक्षा, संस्कार और संगठन सुदृढ़ीकरण के सामूहिक संकल्प के साथ सम्मेलन के प्रथम दिवस का समापन हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में शिक्षकों से जुड़े विभिन्न शैक्षिक एवं संगठनात्मक विषयों पर विचार-मंथन किया जा रहा है।
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