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दूध के भाव बढ़ाने के आंदोलन में महिलाओं की हुंकार, बोलीं-मेहनत का पूरा भाव लेकर रहेंगी


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दूध के भाव बढ़ाने के आंदोलन में महिलाओं की हुंकार, बोलीं-मेहनत का पूरा भाव लेकर रहेंगी

दूध के भाव बढ़ाने के आंदोलन में महिलाओं की हुंकार, बोलीं-मेहनत का पूरा भाव लेकर रहेंगी

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : शैलेंद्र पारीक

बेरी : दूध के उचित भाव बढ़ाने की मांग को लेकर बेरी से शुरू हुआ पशुपालकों का आंदोलन अब धीरे-धीरे बड़ा रूप लेता जा रहा है। किसानों और पशुपालकों के इस आंदोलन में अब महिलाएं भी खुलकर शामिल होने लगी हैं। पशुपालकों ने दूध के उचित दाम दिलाने के साथ ही नकली दूध पर रोक लगाने की मांग को लेकर विभिन्न गांवों में सभाएं आयोजित की। गोठड़ा भूकरान, दीनारपुरा, गिदाणा जोहड़, गुमाना का बास और लक्ष्मण का बास में आयोजित सभाओं में बड़ी संख्या में किसान एवं पशुपालक शामिल हुए। सभाओं में पशुपालकों ने एक स्वर में दूध के भाव बढ़ाने की मांग उठाई।

सभा को संबोधित करते हुए उप जिला प्रमुख ताराचंद धायल ने कहा कि एकजुट हो रहा किसान और पशुपालक अपना हक लेकर रहेगा। उन्होंने सरकार से दूध के भाव बढ़ाकर किसानों के साथ न्याय करने की मांग की। किसान नेता विजेंद्र सिंह काजला ने दूध के उचित भाव दिलाने के साथ नकली दूध पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया। जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि कानाराम जाट ने खल-चूरी के लगातार बढ़ते दामों को लेकर चिंता जताई। पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि किरण मील ने कहा कि किसान अब जाग चुका है और अपने अधिकार के लिए आवाज बुलंद कर रहा है।

महिलाओं ने भी संभाला मोर्चा

आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। प्रभाती भूकर, भंवरी कुलरिया, विमला बिरख, प्रमोद बिरख, पिंटू देवी, अंजू देवी, बिमला, मंजु, बनारसी, संतोष, मनोहरी, झिमकोरी, सावित्री देवी, प्रभाती, मंजु सहित कई महिलाओं ने कहा कि दूध के उचित भाव की मांग को जनजागरण अभियान बनाया जाएगा।

महिलाओं ने कहा कि वे घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी और दूध के उचित भाव की आवाज को मजबूत करेंगी। उन्होंने कहा कि दूध के इस “शुद्ध के युद्ध” में वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन को आगे बढ़ाएंगी।

सभाओं में श्रीचंद भूकर, बलदेव, सरपंच प्रतिनिधि नरेंद्र भूकर, मूलचंद भूकर, चरण सिंह, रामकुमार पंच, भागीरथ गढ़वाल, त्रिलोक कॉमरेड, इंजीनियर रामेश्वर गढ़वाल, दोलतपुरा प्रशासक दिनेश आर्य, जगन गढ़वाल, नागर दूत, रामकुमार ख्यालिया, झाबर बगड़िया, महिपाल धायल, मदन बिरख, भंवराम बिरख सहित कई पशुपालकों ने भी अपने विचार रखे।

इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक मौजूद रहे। आंदोलन में सैकड़ों महिलाओं की मौजूदगी से दूध के उचित भाव की मांग को लेकर चल रही मुहिम को और गति मिलने के संकेत दिखाई दिए।

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