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वन विभाग में 14-लाख की लकड़ी नीलामी की फाइल गायब:रसीद और वीडियो से खुला मामला; DFO ने जारी किया सर्च नोटिस


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झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

वन विभाग में 14-लाख की लकड़ी नीलामी की फाइल गायब:रसीद और वीडियो से खुला मामला; DFO ने जारी किया सर्च नोटिस

वन विभाग में 14-लाख की लकड़ी नीलामी की फाइल गायब:रसीद और वीडियो से खुला मामला; DFO ने जारी किया सर्च नोटिस

झुंझुनूं : झुंझुनूं के वन मंडल कार्यालय में सरकारी संपत्ति की नीलामी को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया है। वन विभाग की पांच रेंज में हुई करीब 14 लाख रुपए की लकड़ी नीलामी का पूरा रिकॉर्ड (पत्रावली) ही ऑफिस से गायब हो गई है। ठेकेदार द्वारा पैसे जमा कराने की रसीद और नीलामी का वीडियो मौजूद है, लेकिन विभाग के पास इसकी आधिकारिक फाइल ही नहीं है।

नीलामी के दौरान डीएफओ कार्यालय में बैठे कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारी।
नीलामी के दौरान डीएफओ कार्यालय में बैठे कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारी।

बंद कमरे में हुई नीलामी, अधिकारी भी थे मौजूद

सामने आए वीडियो के अनुसार, लकड़ी की यह नीलामी DFO कार्यालय के एक बंद कमरे में कराई गई थी। नीलामी प्रक्रिया के दौरान विभाग के सहायक वन संरक्षक (ACF), दो सहायक लेखाधिकारी (AAO) और विवादों में घिरा स्टोर कीपर और कनिष्ठ लिपिक प्रहलाद भी मौजूद था।

इन 5 रेंज की हुई थी नीलामी

जानकारी के अनुसार, नवलगढ़, उदयपुरवाटी, झुंझुनूं, चिड़ावा और खेतड़ी रेंज की सरकारी लकड़ी की नीलामी DFO कार्यालय में आयोजित की गई थी। इस नीलामी में विजेता रहे ठेकेदार जुबेर ने 5 लाख 33 हजार 500 रुपए विभाग में जमा कराए थे, जिसके बदले में उसे ‘GA-55’ सरकारी रसीद (बुक संख्या 0486760) जारी की गई थी।

DFO ने जारी किया सर्च नोटिस

रसीद और वीडियो सामने आने के बाद उप वन संरक्षक (DFO) काव्या बी ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने 1 सितंबर को एक आधिकारिक ‘सर्च नोटिस’ जारी किया, जिसमें गायब हुई पत्रावली की जल्द से जल्द तलाश करने के निर्देश जारी किए हैं।

पहले से चल रहा है रसीद गबन का मामला

बता दें कि झुंझुनूं DFO कार्यालय पहले से ही GA-55 रसीदों के गबन को लेकर विवादों में है। इस प्रकरण में कनिष्ठ लिपिक प्रहलाद को पूर्व में ही एपीओ (APO) किया जा चुका है और उसके खिलाफ कोतवाली थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज है। आरोप है कि उसने GA-55 रसीदें काटकर ठेकेदारों से नकद राशि तो ली, लेकिन उसे सरकारी खजाने में जमा ही नहीं कराया।

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