स्टूडेंट्स बोले- स्कूल जर्जर,बारिश होते ही करनी पड़ती है छुट्टी:थेड़ी गांव से सीकर पहुंचकर कलेक्टर को बताई अपनी पीड़ा; अधिकारियों को तुरंत जांच के लिए भेजा
स्टूडेंट्स बोले- स्कूल जर्जर,बारिश होते ही करनी पड़ती है छुट्टी:थेड़ी गांव से सीकर पहुंचकर कलेक्टर को बताई अपनी पीड़ा; अधिकारियों को तुरंत जांच के लिए भेजा
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : नैना शेखावत
सीकर : सीकर जिले के थेड़ी गांव की गवर्नमेंट स्कूल के स्टूडेंट्स ने मंगलवार को सीकर कलेक्टर आशीष मोदी के पास पहुंचकर अपनी पीड़ा बताई। छात्रों ने बताया कि स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हालत में है और बारिश होते ही छुट्टी करनी पड़ती है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर मोदी ने CDEO और तहसीलदार को तुरंत मौके पर भेजकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए। मामला रामगढ़ शेखावाटी के थेड़ी गांव की गवर्नमेंट स्कूल का है। सांसद अमराराम के नेतृत्व में SFI राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष जाखड़ के साथ स्टूडेंट्स ने ढाका भवन से कलेक्ट्रेट तक नारेबाजी करते हुए रैली निकाली।
इस दौरान कलेक्ट्रेट पहुंचकर थेड़ी स्कूल की बेटियों ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर कहा कि स्कूल की बिल्डिंग इतनी जर्जर है कि बारिश शुरु होते ही प्रिंसिपल छुट्टी करके घर भेज देते हैं, सब्जेक्ट टीचर्स नहीं हैं। पिछले दिनों इन समस्याओं के समाधान के लिए तालाबंदी की थी। तब मौके पर आए शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा था कि विभाग के बस की बात नहीं है, कलेक्टर से मिलो।

सरकारी भूमि को स्कूल के लिए किया जाएगा अलाॅट
स्टूडेंट्स से बातचीत करने के बाद जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने फोन करके मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी और रामगढ़ शेखावाटी तहसीलदार को तुरंत मौके पर जाकर समस्या समाधान की फैक्चुअल रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर मोदी ने ग्रामीणों से कहा कि गांव की सरकारी भूमि को स्कूल के लिए अलाॅट कर दिया जाएगा, लेकिन स्कूल की वर्तमान बिल्डिंग जोहड़ की भूमि में है। ऐसे में इस बिल्डिंग में सरकारी बजट खर्च नहीं किया जा सकता है। ग्रामीणों ने भामाशाह की ओर से 7 बीघा जमीन मिलने की बात कही तो कलेक्टर ने CDEO को बिल्डिंग के लिए रिपोर्ट तैयार करने और टीचर्स के रिक्त पदों का प्रस्ताव शिक्षा विभाग को भिजवाने के निर्देश दिए।

भवन जर्जर होने के कारण बारिश में बच्चों की हो जाती है छुट्टी
स्टूडेंट्स यूनियन SFI के बैनर तले आए ग्रामीणों और स्टूडेंट्स ने ज्ञापन देकर बताया कि 1957 में स्कूल की बिल्डिंग बनी थी। उसके बाद से अब तक मरम्मत नहीं हुई है। भवन इतना जर्जर है कि बूंदाबांदी शुरु होते ही बच्चों की छुट्टी करके घर भेज दिया जाता है।
स्टूडेंट्स पढ़ना चाहते हैं, लेकिन पूरे टीचर्स ही नहीं
स्टूडेंट लक्ष्मी शर्मा ने कहा कि स्कूल की बिल्डिंग में बैठने पर खतरा रहता है बरसात होते ही घर भेज दिया जाता है। स्टूडेंट्स पढ़ना चाहते हैं, लेकिन क्या करें टीचर्स ही नहीं हैं। 12वीं तक स्कूल होने के बाद भी बिल्डिंग जर्जर है, स्कूल में 12 कमरे भी पूरे नहीं हैं। 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स के लिए केवल पॉलीटिकल साइंस का टीचर है, भूगोल (Geography) और हिंदी साहित्य (Literature) का टीचर ही नहीं है। संस्कृत के टीचर भी नहीं हैं, इसलिए स्टूडेंट्स को बहुत कठिनाई होती है। लक्ष्मी ने कहा कि मैं पहली से 12वीं कक्षा तक पढ़ी, लेकिन कभी कोई परिवर्तन नहीं देखा।

स्कूल की बिल्डिंग जर्जर होने के कारण कभी भी हो सकता हादसा
सांसद अमराराम ने बताया कि कक्षा 1 से 12 तक चल रही स्कूल में पर्याप्त कमरे नहीं हैं। स्कूल की बिल्डिंग जर्जर है, छतें और दीवारें कभी भी हादसे का कारण बन सकती हैं। बारिश के दौरान जलभराव और जर्जर बिल्डिंग ढहने के डर से स्कूल प्रशासन को बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। स्कूल की जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में गोचर भूमि के रूप में दर्ज है।
स्कूल में 15 शिक्षकों की बजाय वर्तमान में केवल 8 टीचर
SFI राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष जाखड़ ने कहा कि विद्यालय में स्वीकृत 15 शिक्षकों के पद की बजाय वर्तमान में केवल 8 शिक्षक ही हैं। करीब 50% पद खाली होने के कारण पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा है। सुविधाओं और शिक्षकों के अभाव में नामांकन तेजी से कम हो रहे हैं।
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