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मस्जिदों पर बुलडोजर और UCC के मुद्दे पर मुस्लिम डेलिगेशन की विपक्षी नेताओं से उच्चस्तरीय बैठक


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मस्जिदों पर बुलडोजर और UCC के मुद्दे पर मुस्लिम डेलिगेशन की विपक्षी नेताओं से उच्चस्तरीय बैठक

मस्जिदों पर बुलडोजर और UCC के मुद्दे पर मुस्लिम डेलिगेशन की विपक्षी नेताओं से उच्चस्तरीय बैठक

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : डॉ. रहीम ख़ान
जयपुर : राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किए जाने और यूनीफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के विरोध में मुस्लिम धार्मिक सामाजिक संगठनों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को विपक्ष के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, राजस्थान कांग्रेस प्रभारी महासचिव सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, आदर्श नगर विधायक रफीक खान और किशनपोल विधायक अमीन कागजी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
क्या है पूरा मामला?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद, जमात ए इस्लामी हिंद और अन्य सामाजिक संगठनों का आरोप है कि हाल के दिनों में सीमावर्ती जिलों बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और फलोदी सहित प्रदेश के कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में “ऑपरेशन क्लीन” और “अतिक्रमण हटाओ अभियान” के नाम पर मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
संगठनों के अनुसार अब तक 10 मस्जिदें, 03 मदरसे और 06 दरगाहों को ध्वस्त किया जा चुका है। इनमें कई ऐतिहासिक मस्जिदें, खानकाहें और मदरसे भी शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 150 धार्मिक स्थलों को नोटिस जारी किए गए हैं। आरोप है कि यह कार्रवाई बिना पर्याप्त कानूनी समय दिए और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए की जा रही है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश महासचिव मौलाना अब्दुल वाहिद खत्री ने कहा कि इस मामले में जमीयत विभिन्न अदालतों में कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है।

जमाअत ए इस्लामी हिंद राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मुहम्मद नाज़िमुद्दीन ने कहा कि राजस्थान मंत्रिमंडल द्वारा 13 अगस्त को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंज़ूरी दिए जाने और 20 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में इसे पेश किए जाने के निर्णय का हम कड़ा विरोध करते है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय UCC को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा। यदि संबंधित समुदायों की धार्मिक और सामाजिक व्यवस्थाओं को समाप्त कर उन पर एक समान क़ानून थोपा जाता है, तो यह लोकतांत्रिक सहमति का परिणाम नहीं, बल्कि थोपा हुआ क़ानून होगा।

उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर संबंधित समुदायों को विश्वास में नहीं लिया गया। न तो प्रस्तावित विधेयक का पूरा प्रारूप जनता के सामने रखा गया और न ही उस पर पर्याप्त सार्वजनिक बहस कराई गई। केवल एक ऑनलाइन प्रश्नावली जारी कर लोगों से मुख्यतः हाँ या ना में उत्तर लेना वास्तविक जन-परामर्श का विकल्प नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय समिति की ओर से ज़िला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जन-सुनवाई भी पर्याप्त और निष्पक्ष नहीं थी। उनके अनुसार, बैठक में अधिकांशत ऐसे लोगों को ही बुलाया गया था जो UCC के बारे में कोई जानकारी नहीं रखते थे, जिससे प्रभावित समुदायों की वास्तविक चिंताओं और आपत्तियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि समानता का अर्थ अनिवार्य एकरूपता नहीं है। भारत का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक विविधता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है। इसलिए सामाजिक सुधार के नाम पर धार्मिक व्यक्तिगत क़ानूनों को समाप्त करना संवैधानिक दृष्टि से स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने सरकार से माँग की कि राजस्थान में UCC लागू करने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और प्रस्तावित विधेयक को विधानसभा में आगे न बढ़ाया जाए।
राजस्थान में समान नागरिक संहिता लागू करना न तो संवैधानिक रूप से अनिवार्य है और न ही वर्तमान परिस्थितियों में वांछनीय। व्यक्तिगत विधियों (पर्सनल लॉ) को समाप्त कर एकरूपता थोपने का प्रयास संविधान की मूल भावना तथा धार्मिक स्वतंत्रता के प्रतिकूल है और इससे समाज के विभिन्न वर्गों में असुरक्षा एवं अविश्वास की भावना उत्पन्न हो सकती है। अगर ये बिल राजस्थान में लागू किया जाता है तो इसका लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीक़े से पुरजोर विरोध किया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने रखीं ये प्रमुख मांगें
विपक्षी नेताओं से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने यह मुख्य बिंदु रखे:
1.  एकतरफा कार्रवाई पर रोक: न्यायपालिका के दिशा-निर्देशों के खिलाफ हो रही त्वरित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
2.  संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा: समुदाय के धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर हो रहे हमले से पैदा हुए असुरक्षा के माहौल को खत्म किया जाए।
3.  विधानसभा में मुद्दा उठाना: विपक्ष से आग्रह किया गया कि वे जनता की इन चिंताओं को विधानसभा के मौजूदा सत्र में कार्यस्थगन प्रस्ताव और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से पुरजोर तरीके से उठाएं।
4. प्रतिनिधिमंडल ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) और सीमावर्ती जिलों में हो रही विध्वंसक कार्रवाई को असंवैधानिक भी बताया। प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा में लाए जा रहे UCC बिल का पुरजोर विरोध करने का भी विपक्षी नेताओं से आग्रह किया।
विपक्ष ने दिया आश्वासन
मुलाकात के दौरान विपक्षी नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। नेताओं ने कहा कि किसी भी समुदाय के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और इस मुद्दे को विधानसभा में मजबूती से उठाया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल थे
इस प्रतिनिधिमंडल में मौलाना अब्दुल वाहिद खत्री, महासचिव जमीयत उलेमा-ए-हिंद राजस्थान, मोहम्मद नाज़िमुद्दीन, प्रदेश अध्यक्ष जमाअत-ए-इस्लामी हिंद राजस्थान, हाफिज मंजूर, नायब सदर जमीयत उलेमा राजस्थान, मौलाना अब्दुल हमीद, अध्यक्ष जमीयत उलेमा जयपुर, मुफ्ती मोहम्मद शफीक कायमखानी, महासचिव जमीयत उलेमा जयपुर, अब्दुल लतीफ आरको, अध्यक्ष प्रांतीय मुस्लिम तेली महापंचायत और एडवोकेट किफायतुल्लाह खान शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ इमारतों की नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार की है।

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