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मृत्यु के बाद खर्चीली रस्मों के बजाय गौसेवा को चुना, समाज को दी नई दिशा


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मृत्यु के बाद खर्चीली रस्मों के बजाय गौसेवा को चुना, समाज को दी नई दिशा

मृत्यु के बाद खर्चीली रस्मों के बजाय गौसेवा को चुना, समाज को दी नई दिशा

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : शैलेंद्र पारीक

बड़वासी : भोमजी की ढाणी तन बड़वासी निवासी राजपूत परिवार ने परिजन के निधन के बाद पारंपरिक दिखावे और अनावश्यक खर्चों से अलग हटकर सेवा और गौसेवा को प्राथमिकता देते हुए समाज के सामने अनुकरणीय मिसाल पेश की।

राजपूत परिवार की श्रीमती चंद्र कंवर पत्नी स्व. ईश्वर सिंह का 115 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया गया कि उन्होंने अपने जीवनकाल में सात पीढ़ियों को देखा। उनके निधन के बाद परिवार ने मृत्यु भोज एवं अन्य खर्चीली रस्मों के बजाय सत्संग, सेवा और गौसेवा को महत्व देने का निर्णय लिया।

गौशाला अध्यक्ष एडवोकेट कमलेश कुमावत ने बताया कि परिवार एवं रिश्तेदारों ने मिलकर 51 हजार रुपये की राशि गौशाला में गौसेवा के लिए दान की। इस पुनीत कार्य में बिशन सिंह, भागीरथ सिंह, गोवर्धन सिंह, स्व. रामकुमार सिंह के पुत्र, स्व. बहादुर सिंह के पुत्र तथा स्व. मोहन सिंह की पुत्री सहित परिजनों ने सहभागिता निभाई।

गौशाला सचिव मुकेश सीगड़ ने परिवार एवं रिश्तेदारों का आभार जताते हुए कहा कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक संदेश देती है। उन्होंने परिवार के इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायी बताया।

परिवार की इस पहल ने यह संदेश दिया कि दिवंगत परिजन की स्मृति में अनावश्यक खर्च करने के बजाय सेवा, सत्संग और गौसेवा जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में योगदान देकर समाज को नई दिशा दी जा सकती है।

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