इंडियन स्कूल की बस का हाईवे पर कई किलोमीटर तक बच्चो के साथ खौफनाक ‘मौत का सफर’
बजाज स्कूल की 15 नंबर बस ने भी मौत का सफर करने में नही छोड़ी कसर, बाल बाल बची मीडिया टीम, एम आर जे स्कूल की बस के फिटनेस ने तोड़ा दम, तो दूसरी बस के नहीं है पीछे का सेफ्टी ग्लास... मौत की ताक पर मासूम
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान दाडून्दा (विशेष ग्राउंड रिपोर्ट)
जनमानस शेखावाटी की टीम ने जान की बाजी लगाकर बस रोक कर बचाई मासूमों की जान
बार बार खबरों के बाद भी आरटीओ और पुलिस मोन, सेटिंग या सिस्टम नतमस्तक?
फतेहपुर : एक ओर जहाँ पूरे प्रदेश में ‘सड़क सुरक्षा अभियान’ की आड़ में आम जनता को नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है-जहाँ बिना हेलमेट, गलत दिशा या अधूरे कागजात पर आरटीओ और कोतवाली पुलिस तुरंत कार्रवाई करते हुए चालान ठोक देती है। बेशक, कानून का पालन होना ही चाहिए। लेकिन दूसरी ओर, रसूख के साए में कानून को ठेंगा दिखाते नामचीन कुछ स्कूली वाहन जब नेशनल हाईवे पर सरेआम मौत का गदर मचाते हैं, तब पुलिस और परिवहन विभाग की आंखें किस दबाव में बंद हो जाती हैं?
आम नागरिक का चालान काटने के लिए चील जैसी पैनी नजर रखने वाला हमारा यह बहादुर अमला, पचास-पचास फीट लंबी स्कूली बसों के हाईवे पर उल्टी दिशा में दौड़ते ही अचानक मौन सिखाई दे रहा है। लगता है अफसरों को लगता है कि बच्चे स्कूल पढ़ने नहीं, बल्कि मौत के इस सर्कस में रोज ‘स्टंट’ सीखने आते हैं!
हाल ही में ऐसे कई स्कूली वाहनों के चौंकाने वाले कारनामे कैमरे में कैद हुए हैं। हाईवे पर सामने से 18 चक्के के विशालकाय ट्रैलर और तेज रफ्तार ट्रैक्टर अपनी सही दिशा में आ रहे थे। अगर चालकों की ज़रा सी भी चूक हो जाती, तो दर्जनों मासूमों का क्या हाल होता? अभिभावक रातों की नींद हराम कर जिन लाडलों को पालते हैं, क्या वे सुबह इन बेखौफ ‘मौत के सौदागरों’ के भरोसे सड़क पर निकल रहे हैं? यह महज़ खबर नहीं, वह कड़वी तस्वीर है जहाँ हादसों के बाद माताओं की चीखें सुनाई देती हैं। शुक्रवार सुबह जनमानस शेखावाटी की टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर विशेष स्टिंग ऑपरेशन चलाया और गलत दिशा में दौड़ती इन बसों को रुकवाकर बड़ा हादसा होने से बचाया।
इंडियन स्कूल का ‘अनुभव’ या मौत का खतरनाक सफर?
फतेहपुर का ‘इंडियन पब्लिक स्कूल’ भारी-भरकम फीस लेकर अपने वर्षों के ‘उत्कृष्ट अनुभव’ का ढिंढोरा पीटता है। शायद इस ‘अनुभव’ में बच्चों को हाईवे पर मौत का लाइव डेमो देना भी शामिल है! शुक्रवार सुबह देवास से फतेहपुर के बीच इस स्कूल की बस (RJ 23 PB 4616) हाईवे-52 पर कई किलोमीटर तक रोंग साइड दौड़ती रही। अंदर मासूम बच्चे खिड़कियों से बाहर मुँह निकाले ‘मौत का झूला’ झूल रहे थे। अगर किसी भारी वाहन का ब्रेक फेल हो जाता, तो इस भयानक तबाही का ज़िम्मेदार कौन होता? क्या स्कूल प्रबंधन अपने ‘अनुभव’ के दम पर उन उजड़ते चिरागों को वापस लौटा पाता?
तारादेवी रामेश्वरलाल बजाज स्कूल की बस से बाल-बाल बची टीम!
लापरवाही की हद तो तब हो गई जब ‘तारादेवी रामेश्वरलाल बजाज स्कूल’ (ढांढन) की बस नंबर 15 (RJ 23 PB 4404) भी गलत दिशा में सीधे हमारी टीम की गाड़ी के सामने आ धमकी। मानो बस चालक को हाईवे नहीं, अपनी जागीर का कोई खेत मिल गया हो! चालक ने ऐन वक्त पर सूझबूझ दिखाते हुए कट मारकर गाड़ी बचाई, वरना मासूमों की जान बचाने निकली पत्रकारों की टीम खुद हादसे का शिकार हो जाती। यह पूरी हैवानियत हमारे कैमरामैन ने ‘लाइव’ कैद की है।
एमआरजे स्कूल की बस के नहीं था पीछे का सेफ्टी ग्लास, फिटनेस ने तोड़ा दम जुगाड़ी बस किस से कम?
‘एम आर जे बहुउद्देशीय साइंस स्कूल’ की बस (RJ 23 PB 6997) का पिछला मुख्य सेफ्टी ग्लास ही नदारद था, जिसे केवल रस्सी और फटे कपड़ों के जुगाड़ से ढका गया था। इसे कहते हैं असली ‘साइंस स्कूल’ का बेजोड़ देशी आविष्कार! वहीं इसी स्कूल की दूसरी बस (RJ 23 PB 7759) का फिटनेस सर्टिफिकेट पूरी तरह दम तोड़ चुका चुका था। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) निर्मित बताने वाले तथाकथित शुभचिंतकों की अक्ल पर तरस आता है—साहब, आपके इस जानलेवा जुगाड़ के आगे तो दुनिया की सारी टेक्नोलॉजी शर्मसार हो जाए!
हजारों फीस लेने वालो… ये सीधा सवाल
अभिभावक पेट काटकर और दूर-दराज में मजदूरी करके इन ज्ञान की दुकानों को मोटी फीस भेजते हैं। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं कि उनके लाडले इन ‘मौत के ताबूतों’ में हिलोरे खा रहे हैं। डीज़ल के महज दो रुपये और कुछ मिनट बचाने के चक्कर में ये संवेदनहीन स्कूल प्रबंधक मासूमों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।
कहां सो रही है फतेहपुर कोतवाली पुलिस और आरटीओ विभाग?
30 ग्राम गांजा पकड़कर सोशल मीडिया पर अपनी पीठ थपथपाने वाले कोतवाल साहब और ट्रकों के पीछे दनादन दौड़ने वाले आरटीओ के सूरमाओं को 30-40 मासूमों को रोजाना मौत की सैर कराने वाले ये दबंग नज़र क्यों नहीं आते? क्या खाकी का सारा इकबाल केवल गरीब रेहड़ी वालों और आम बाइक सवारों पर ही चलता है? क्या आरटीओ और पुलिस प्रशासन किसी बड़े नरसंहार और माताओं के चीत्कार का इंतजार कर रहे हैं, ताकि बाद में दो कागजी जांचों का ढोंग रचा जा सके?
मुकदमों की धमकियों और दबावों से जनमानस शेखावाटी की टीम डरने वाली नहीं है, मासूमों की सुरक्षा के लिए हमारी यह कानूनी और पत्रकारिता की जंग लगातार जारी रहेगी। अभिभावकों से भी अपील है कि वे नींद से जागें और अपने लाडलों को इन बसों में बिठाने से पहले वाहनों के फिटनेस व कागजात ज़रूर जांचें!



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