[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

‘अमेरिका के सामने घुटने टेक रही मोदी सरकार’:सीपीआईएमएल के राष्ट्रीय महासचिव बोले- धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास कर रहे


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

‘अमेरिका के सामने घुटने टेक रही मोदी सरकार’:सीपीआईएमएल के राष्ट्रीय महासचिव बोले- धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास कर रहे

'अमेरिका के सामने घुटने टेक रही मोदी सरकार':सीपीआईएमएल के राष्ट्रीय महासचिव बोले- धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास कर रहे

झुंझुनूं : केंद्र सरकार की आर्थिक व प्रशासनिक नीतियों, किसान-मजदूरों के अधिकारों तथा आगामी निकाय-पंचायत चुनावों को लेकर सीपीआईएमएल (CPIML) ने केंद्र पर हमला बोला है। झुंझुनूं में किसान मजदूर भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद राजाराम सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की।

सीपीआईएमएल के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि जिस प्रकार अंग्रेजों ने देश को नुकसान पहुंचाया, उसी तर्ज पर केंद्र सरकार अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों (ट्रेड डील) के जरिए देश की खेती और किसानों को संकट में डाल रही है। बीजेपी और आरएसएस पर आदिवासियों को उनकी परंपरा, जल-जंगल-जमीन और पहचान से दूर कर धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

​उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के बाजारीकरण को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। नरेगा (मनरेगा) जैसी योजनाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले पंचायतों के पास जो अधिकार थे, उन्हें केंद्र सरकार अपने हाथों में केंद्रित कर रही है।

​खेती और किसान को नीलाम नहीं होने देंगे: सांसद राजाराम

समारोह के दौरान अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद राजाराम सिंह ने संकल्प दोहराया कि किसी भी विदेशी ताकत को भारत के किसानों के अधिकार नहीं छीनने दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश की खेती, किसान और मजदूरों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

​परिसीमन को लेकर जताई आशंका

लोकसभा सीटों के परिसीमन (परिमार्जन) के सवाल पर सांसद राजाराम सिंह ने स्पष्ट किया कि आबादी के हिसाब से परिसीमन होने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में किए गए परिसीमन के तरीकों पर उन्होंने शंका व्यक्त की।

​उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के जरिए उत्तर भारत में सीटें बढ़ाकर इस प्रकार का ढांचा तैयार करने की कोशिश हो सकती है, जिससे गैर-भाजपा या दक्षिणी राज्यों के सहयोग के बिना भी संवैधानिक संशोधन किए जा सकें। इसे महिला आरक्षण से जोड़ने को उन्होंने गलत ठहराते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक स्थिति है।

Related Articles