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राम भरोसे ‘रामगढ़’ : जलमग्न दफ्तर, बेबस जनता; बिजली विभाग में घुसा ‘बरसाती सितम’, बिल्डिंग और ट्रांसफार्मर गिरने के कगार पर!


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राम भरोसे ‘रामगढ़’ : जलमग्न दफ्तर, बेबस जनता; बिजली विभाग में घुसा ‘बरसाती सितम’, बिल्डिंग और ट्रांसफार्मर गिरने के कगार पर!

कर्मचारी खोफ के साए में जिम्मेदार मौन, वादों का ढोल बजाते नेता गायब? दीवार फांदकर' दफ्तर में घुसने को मजबूर हुए कर्मचारी और उपभोक्ता!

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान, दाडून्दा/ अनिल शेखीसर की विशेष रिपोर्ट

रामगढ़ सीकर : एक तरफ जहाँ प्रदेश की सरकार और विद्युत निगम का आला अमला जनता को 24 घंटे निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण बिजली सप्लाई देने और हाई-टेक नागरिक सेवाएँ मुहैया कराने के दावों के बड़े-बड़े ढोल पीट रहा है, वहीं दूसरी ओर सीकर जिले के रामगढ़ शेखावाटी के दफ्तर की कड़वी जमीनी हकीकत इन सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा रही है। आलम यह है कि रामगढ़ के बिजली विभाग के दफ्तर तक उपभोक्ता अपनी समस्याओं का समाधान कराने के लिए पहुँच भी नहीं पा रहे हैं। बिजली विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय के ठीक सामने बनी मुख्य सड़क आज किसी सड़क की तरह नहीं, बल्कि लबालब भरे किसी गहरे तालाब की तरह नजर आ रही है। पानी केवल सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि दफ्तर की मुख्य चौखट को पार करते हुए ऑफिस के कमरों के अंदर तक घुस चुका है। दफ्तर की दीवारें सीलन से जर्जर होकर गिरने के कगार पर पहुँच चुकी हैं और आमजन को अपने रोजमर्रा के बिजली संबंधी काम करवाने के लिए भारी जद्दोजहद और जानलेवा मशक्कत करनी पड़ रही है।

जल भराव के बीच मशक्कत करता बाइक सवार
बिजली विभाग के दफ्तर के आगे जलसैलाब

​प्राप्त जानकारी और स्थानीय इतिहास के अनुसार, कई वर्षों पहले बिजली विभाग के सामने एक विशाल प्राकृतिक ‘जोहड़ा’ हुआ करता था, जहाँ पूरे इलाके का बरसाती पानी आसानी से चला जाता था। लेकिन आधुनिक विकास की आंधी और ‘अमृत योजना’ के तहत जब इस जोहड़े का जीर्णोद्धार (रेनोवेशन) किया गया, तो इसके चारों तरफ पक्की ऊँची दीवारें खड़ी कर दी गईं। इस अदूरदर्शी निर्माण की वजह से बरसाती पानी के कुदरती निकास का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और नतीजा यह निकला कि अब बरसाती पानी सीधे बिजली विभाग के दफ्तर के मुहाने पर आकर इकट्ठा हो जाता है।

बिजली विभाग का दफ्तर गिरने के कगार पर: ग्राउंड जीरो से रोंगटे खड़े करने वाला नजारा
​जनमानस शेखावाटी न्यूज के चीफ जर्नलिस्ट आबिद खान और अनिल शेखिसर ने जब ज़मीनी सच्चाई जानने और जनहित का मुद्दा उठाने ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचे, तो बिजली विभाग के दफ्तर का मुख्य प्रवेश द्वार पानी के सैलाब में पूरी तरह डूब चुका था। सामने से अंदर जाने का कोई रास्ता मौजूद नहीं था। हमारी टीम की व्यथा देखकर अंदर मौजूद निगम के कर्मचारियों ने पीछे की बाउंड्री वॉल के पास कुर्सी लगाकर हमारी टीम को दीवार पार करवाकर किसी तरह अंदर लिया। जब दफ्तर के भीतर का जायजा लिया गया, तो नजारा रोंगटे खड़े करने वाला था। दफ्तर के चारों तरफ गंदा पानी हिलकोरे ले रहा था, कमरों के भीतर पानी भरा हुआ था, और अधिकारी व कर्मचारी टेबल-कुर्सियों पर लाचार बैठे नजर आ रहे थे। मानो किसी सदमे में हो। अपने ही दफ्तर में बंधक बने इन कर्मचारियों के चेहरों पर खौफ साफ झलक रहा था।

पानी में डूबता ट्रांसफार्मर

ट्रांसफार्मर गिरने के कगार पर: क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन?
​जब हमारी टीम ने निगम परिसर के सामने का जायजा लिया, तो एक और बेहद चौंकाने वाला और भयावह दृश्य सामने आया। दफ्तर के ठीक सामने लगा हाई-टेंशन लाइन का विशाल ट्रांसफार्मर पानी में पूरी तरह डूब चुका था सबसे बड़ा खतरा यह है कि इस ट्रांसफार्मर में 24 घंटे दौड़ रहा हाई-वोल्टेज करंट किसी भी वक्त पानी में उतर सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो यहाँ पानी में तैरकर आने जाने वाले कर्मचारियों या उपभोक्ताओं के साथ कोई बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता है। क्या स्थानीय प्रशासन और जन-प्रतिनिधि किसी निर्दोष की मौत के बाद ही नींद से जागेंगे?

दीवार फांदते दिखे कर्मचारी और उपभोक्ता
​सिस्टम की नाकामी की हद तो तब हो गई जब हमारी टीम के कैमरे में वो शर्मनाक तस्वीरें कैद हुईं, जिन्हें देखकर रोंगटे खड़े हो जाए बिजली के बिल जमा कराने, कनेक्शन की गुहार लगाने या फॉल्ट ठीक कराने आए आम नागरिक और अपनी ड्यूटी बजाने आए कर्मचारी रामगढ़ शाखा के इस दफ्तर की पीछे की ऊँची दीवार पर चढ़कर, दीवार फांदकर अंदर-बाहर आते-जाते दिखे। जो दफ्तर जनता की सुविधा के लिए बना था, वह आज एक खतरनाक ‘ऑब्स्टेकल रेस’ का मैदान बन चुका है। चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेता आज इस बदहाली पर मुँह छिपाए बैठे हैं और जनता जलभराव की इस त्रासदी को झेलने के लिए मजबूर है।

दीवार फांदता कर्मचारी

क्या हैं समाधान? एक्सपर्ट्स की राय
​इस विकराल होती समस्या को लेकर जब हमारी टीम ने नगर नियोजन और सिविल एक्सपर्ट्स से राय जानी, तो उन्होंने दो त्वरित समाधान बताए:
​उनका कहना था कि आसपास के इलाके में तुरंत बड़े क्षमता वाले वाटर रीचार्ज वेल (भूजल पुनर्भरण कुएं) बनाए जाएँ। ​तथा अस्थाई तौर कर दफ्तर के सामने वाले बड़े गेट को फिलहाल अस्थाई रूप से बंद करके दीवार पर वाटरप्रूफ टाइल्स लगा दी जाएँ, ताकि पानी अंदर न घुसे। और दीवार न गिरे साथ ही पीछे की तरफ जो नई पक्की सड़क बनी है, उस तरफ दीवार में दूसरा छोटा मुख्य दरवाजा निकाल दिया जाए। इससे जर्जर होती सरकारी बिल्डिंग को ध्वस्त होने से बचाया जा सकता है और उपभोक्ता व कर्मचारी बिना जान जोखिम में डाले आसानी से दफ्तर आ-जा सकेंगे।

इनकी भी सुनो ज़िम्मेदारों और पीड़ितों के सीधे बयान”डर के साए में काम कर रहे हैं कर्मचारी”
“हम लोग और उपभोक्ता इस जहरीले गंदे पानी में उतरकर अंदर आते हैं। अंदर आने के बाद हर पल बिल्डिंग गिरने का डर सताता रहता है। पूरी इमारत में नीचे से ऊपर तक सीलन आ चुकी है। कई बार तो पानी दफ्तर के कमरों में इतना भर जाता है कि हमारे महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड फाइले और कंप्यूटर भीगने का खतरा बन जाता है। ऐसी दहशत में कोई भी कर्मचारी निर्भीक होकर और कॉन्फिडेंस के साथ काम नहीं कर पा रहा है। कई-कई बार तो रूटीन के सारे विभागीय कार्यों को छोड़कर पूरे स्टाफ को दफ्तर से पानी निकालने में जुटना पड़ता है। यहाँ के हालात बद से बदतर हो चुके हैं।” खोफ के साए में जीवन जी रहे हैं। काम करने में कॉन्फिडेंस नही आ रहा हैं। – राकेश विजय (सहायक अभियंता – AEN, बिजली विभाग कार्यालय, रामगढ़ शेखावाटी)

​”विरोध के कारण रुका काम, अब रीचार्ज वेल से होगा पक्का समाधान”
“पूर्व तहसीलदार हितेश चौधरी जी के समय में जब पवन जी रामगढ़ एसएचओ थे, उस समय हमने पुलिस जाब्ते के साथ तीन बार पानी निकासी का प्रयास किया था। यहाँ तक कि गड्ढा भी खुदवा दिया था और पंप हाउस बना रहे थे, लेकिन स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण यह कार्य पूरा नहीं हो पाया। स्थानीय लोगों का तर्क था कि यह जमीन ‘जोहड़ पाइतन’ की है, जबकि जोहड़ पाइतन भी पानी की कुदरती निकासी का ही हिस्सा होता है। फिलहाल हम यहाँ वाटर रीचार्ज वेल बना रहे हैं, जिससे यह बरसाती पानी सीधे जमीन के अंदर रीचार्ज हो जाएगा। इसके लिए दो बोरवेल करवा दिए गए हैं, अब उसका तकनीकी सिस्टम बनना बाकी है। चूरू, सीकर और लक्ष्मणगढ़ में जिस तरह के रीचार्ज सिस्टम बने हैं, वैसा ही सिस्टम यहाँ बना रहे हैं। हालाँकि इसे पूरी तरह तैयार होने में थोड़ा समय लगेगा क्योंकि कंक्रीट के स्ट्रक्चर और चेंबर का काम बकाया है। चेंबर के थ्रू पानी बोरिंग में जाने लगेगा, जिसके बाद यह जलभराव की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।” – जयकरण गुर्जर (अधिशासी अधिकारी – EO, नगर पालिका, रामगढ़ शेखावाटी, सीकर)

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