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उर्वरक संकट पर किसान व्यापारी पूर्व मंत्री ओला से मिले:कृषि आदान व्यापार की समस्याओं पर झुंझुनूं सांसद को सौंपा ज्ञापन


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चिड़ावाझुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

उर्वरक संकट पर किसान व्यापारी पूर्व मंत्री ओला से मिले:कृषि आदान व्यापार की समस्याओं पर झुंझुनूं सांसद को सौंपा ज्ञापन

उर्वरक संकट पर किसान व्यापारी पूर्व मंत्री ओला से मिले:कृषि आदान व्यापार की समस्याओं पर झुंझुनूं सांसद को सौंपा ज्ञापन

चिड़ावा : चिड़ावा में झुंझुनूं कृषि आदान समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने सांसद और पूर्व मंत्री विजेंद्र ओला से मुलाकात की। इस दौरान कृषि आदान व्यापार में आ रही विभिन्न समस्याओं को लेकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा गया। समिति के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राव के नेतृत्व में ये मुलाकात हुई, जिसमें कोषाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार झुंझुनू, समिति प्रवक्ता भूराराम लालपुरिया और ओमप्रकाश पायल सुलताना भी शामिल थे।

ज्ञापन में बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई घटनाओं के कारण पिछले कुछ समय से उर्वरक संकट उत्पन्न हो गया है। इससे कृषि आदान व्यापार में काफी दिक्कतें आ रही हैं और कृषि आदान विक्रेताओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय द्वारा लागू किए जा रहे विभिन्न कानूनों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया- ये कानून जमीनी स्तर पर लागू करना संभव नहीं है और इनके समाधान के लिए विस्तृत बातचीत की आवश्यकता है।

समिति ने अपनी प्रमुख मांगों में खाद पर जबरन लिंकिंग टेकिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, खाद की डिलीवरी कंपनियों द्वारा डीलर के बिक्री केंद्र तक सुनिश्चित करने और बढ़ती महंगाई को देखते हुए डीलर मार्जिन को कम से कम 10 प्रतिशत करने की मांग की। इसके अलावा, साथी पोर्टल में ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए राहत देने और इसे वैकल्पिक बनाने पर जोर दिया गया।

अन्य मांगों में अवैध बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने, विक्रेता को साक्षी का दर्जा देने, एक्सपायर कीटनाशक नीति बनाने, नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में कानूनी संशोधन करने, किसानों की शिकायत पर जिला जांच कमेटी बनाने और लाइसेंस निलंबित की प्रक्रिया को 21 दिन में बहाल करने की बात शामिल थी। समिति ने हर साल ओ-फॉर्म जोड़ने की अनिवार्यता खत्म करने और दोहरी लाइसेंस प्रथा बंद करने की भी मांग की।

सांसद विजेंद्र ओला ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वे इन सभी समस्याओं को उर्वरक मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के समक्ष रखेंगे और उनके समाधान के लिए प्रयास करेंगे।

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