मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर बुल्डोज़र कार्रवाई का आदेश शिक्षा, न्याय और संविधान पर हमला
मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर बुल्डोज़र कार्रवाई का आदेश शिक्षा, न्याय और संविधान पर हमला
नई दिल्ली : स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) की पश्चिम उत्तर प्रदेश (UP West) इकाई ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की इमारतों को ध्वस्त करने के लिए रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा जारी आदेश तथा विश्वविद्यालय परिसर की सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित करना देश की शिक्षा व्यवस्था, क़ानून व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है।
मीडिया को जारी सार्वजनिक बयान में कहा गया है कि मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि शिक्षा से वंचित तबक़ों के सपनों, सामाजिक भागीदारी और सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण केंद्र है। इस विश्वविद्यालय में हज़ारों छात्र-छात्राएँ शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसकी इमारतों को ध्वस्त करने की कार्रवाई का आदेश किसी एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि उन हज़ारों विद्यार्थियों के भविष्य, उनके शिक्षा के अधिकार और समाज की शैक्षणिक संपदा पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के संचालन या निर्माण से संबंधित कोई क़ानूनी या प्रशासनिक प्रश्न हैं, तो उनका समाधान न्यायिक प्रक्रिया, निष्पक्ष जांच और संवैधानिक तरीक़ों से किया जाना चाहिए। बुल्डोज़र को न्याय का विकल्प बनाना क़ानून के शासन (Rule of Law) और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि, दुर्भाग्यपूर्ण रूप से यह कार्रवाई व्यापक स्तर पर उस सिलसिले का हिस्सा है, जहाँ पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समुदाय को चुनिंदा रूप से निशाना बनाया गया है। मुसलमानों के घरों और संस्थानों पर बुल्डोज़र कार्रवाई, उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को संदेह की दृष्टि से देखना, तथा मुस्लिम नेताओं को चुनिंदा रूप से आपराधिक मामलों में घेरना, इन सबने देश के मुसलमानों मैं राज्य के प्रति अविश्वास और असुरक्षा की भावना को गहरा किया है। मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी उसी क्रम की एक कड़ी दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि, राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी भी सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह राजनीतिक विरोध या व्यक्तिगत विवादों की बुनियाद पर शैक्षणिक संस्थानों को नुक़सान पहुँचाए। एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय और उसमें पढ़ने वाले हज़ारों विद्यार्थियों से शिक्षा का अधिकार छीनना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकता। हम उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग करते हैं कि विश्वविद्यालय की इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश को तत्काल वापस लिया जाए। हम सभी सामाजिक और राजनीतिक संगठनों, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और छात्न समुदाय से अपील करते हैं कि वे इस कार्रवाई के विरुद्ध आवाज़ उठाएँ और शिक्षा को राजनीतिक प्रतिशोध से बचाने के लिए एकजुट हों।
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