प्रसूता की मौत पर नीमकाथाना अस्पताल के बाहर धरना:परिजनों का आरोप- ब्लीडिंग के बावजूद ब्लड नहीं चढ़ाया; डॉक्टर्स पर कार्रवाई की मांग
प्रसूता की मौत पर नीमकाथाना अस्पताल के बाहर धरना:परिजनों का आरोप- ब्लीडिंग के बावजूद ब्लड नहीं चढ़ाया; डॉक्टर्स पर कार्रवाई की मांग
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : नैना शेखावत
सीकर : सीकर में प्रसव के बाद महिला की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर्स पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नीमकाथाना अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी डॉक्टर्स पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। गुस्साई महिलाओं ने हॉस्पिटल के गेट को बंद कर दिया। मामला नीमकाथाना में गुरुवार सवेरे का है। धरने की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस, पीएमओ, तहसीलदार मौके पर पहुंचे और समझाइश के प्रयास जारी है। हालांकि, मामले में परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच पहले दौर की वार्ता विफल रही।
परिजनों ने प्रशासन के सामने तीन मांगे रखी। इनमें दोषी डॉक्टर पर पर तुरंत कार्रवाई, मेडिकल बोर्ड से महिला का पोस्टमार्टम, मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और परिजनों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग रखी। इन मांगों को लेकर करीब आधे घंटे तक वार्ता का दौर चला, लेकिन वार्ता बेनतीजा निकली। इस दौरान तहसीलदार देवीलाल चौधरी, पीएमओ कमल सिंह शेखवात, सीआई विक्रम सिंह, एडवोकेट गोपाल सैनी, मंजू सैनी, विनोद भूदोली, खादरा सरपंच राजू मीणा सहित कई लोग मौजूद रहे।

नीमकाथाना के खादरा निवासी राजकुमार सैनी ने बताया- उसकी पत्नी अंजली (25) को प्रसव पीडड़ा के चलते 12 जुलाई को नीमकाथाना के मातृ एवं शिशु हॉस्पिटल में एडमिट कराया था। 14 जुलाई को अंजली की पहली डिलीवरी सिजेरियन से हुई।
‘लगातार ब्लीडिंग होती रही, ब्लड चढ़ाने से मना किया’
राजकुमार ने बताया- ऑपरेशन के बाद से अंजली को लगातार ब्लीडिंग होती रही, लेकिन अस्पताल में ब्लड चढ़ाने से मना कर दिया और इसे सामान्य ब्लीडिंग बताया। हालत बिगड़ने पर अंजली को जयपुर रेफर कर दिया। चौमू के बराला हॉस्पिटल में अंजलि को एडमिट किया गया, जहां दो यूनिट ब्लड चढ़ाया।

इसके बावजूद 15 जुलाई की रात को इलाज के दौरान अंजली की मौत हो गई। मौत के बाद परिजन और ग्रामीण नीमकाथाना के मातृ एवं शिशु हॉस्पिटल पहुंचे और डॉक्टर्स पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।
जयपुर में इलाज के दौरान तोड़ा दम
परिजनों का आरोप है कि हालत बिगड़ने पर महिला को जयपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन अस्पताल से सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूरी में निजी एम्बुलेंस से उसे जयपुर के बराला अस्पताल ले जाया गया। परिजन और ग्रामीण दोषी डॉक्टर्स पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
डॉक्टर बोले- हायर सेंटर रेफर किया
हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ने बताया- अंजली को 12 जुलाई को दोपहर करीब 3:30 बजे भर्ती किया गया था। यह उसकी पहली डिलीवरी थी और मरीज में खून की कमी (एनीमिया) थी। भर्ती के दिन उसे एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। 13 जुलाई को उसकी स्थिति सामान्य थी। 14 जुलाई को दोपहर करीब 1 बजे सिजेरियन ऑपरेशन से प्रसव कराया गया। इसके बाद करीब 3:30 बजे ब्लीडिंग शुरू हुई, जिसे नियंत्रित करने के प्रयास किए गए, लेकिन ब्लीडिंग नियंत्रित नहीं होने पर मरीज को उच्च केंद्र (हायर सेंटर) रेफर कर दिया गया।
फिलहाल, पुलिस और प्रशासन मौके पर मौजूद है तथा परिजनों से वार्ता की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई प्रशासनिक जांच के बाद तय होगी। राजकुमार सैनी जनरल स्टोर संचालित करते हैं। नवजात बच्चा स्वस्थ बताया जा रहा है।
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