डॉक्टर बोला- मैं अनपढ़ हूं, निकालो मुझे हॉस्पिटल से बाहर:छाती में फ्रैक्चर को बताया मामूली चोट; परिजन बोले- आपको शर्म आनी चाहिए
डॉक्टर बोला- मैं अनपढ़ हूं, निकालो मुझे हॉस्पिटल से बाहर:छाती में फ्रैक्चर को बताया मामूली चोट; परिजन बोले- आपको शर्म आनी चाहिए
झुंझुनूं : झुंझुनूं के बीडीके हॉस्पिटल में एक्सीडेंट में घायल युवक के इलाज को लेकर विवाद सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि ऑर्थोपेडिक डॉक्टर जगदेव सिंह ने एक्स-रे देखने के बाद भी छाती में फ्रैक्चर नहीं बताया और मरीज को दवाइयां देकर घर भेज दिया। बाद में परिवार के एक कंपाउंडर सदस्य ने छाती में फ्रैक्चर होने की बात कही। इसके बाद जब परिजन 15 जुलाई को दोबारा डॉक्टर से मिले तो डॉक्टर चैम्बर में मरीजों के सामने बहस हो गई। इसी दौरान डॉक्टर ने कहा, “मैं पढ़ा हुआ नहीं हूं, मैं तो अनपढ़ हूं, निकालो मुझे हॉस्पिटल से बाहर,” जिसका वीडियो भी सामने आया है।
यह है मामला
गांव डूमरा निवासी विकास महला का 12 जुलाई की देर शाम बाइक दुर्घटना में एक्सीडेंट हो गया था। परिजन अगले दिन 13 जुलाई की सुबह उसे उपचार के लिए बीडीके हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। विकास के भाई मुकेश महला ने बताया कि ऑर्थोपेडिक डॉक्टर जगदेव सिंह ने एक्स-रे करवाया और रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने दवाइयां लिखकर मरीज को घर भेज दिया।

कंपाउंडर ने देखा तो पता चला फ्रैक्चर
मुकेश महला ने बताया कि घर जाने के बाद जब उनके परिवार के एक सदस्य, जो कि कंपाउंडर हैं, उन्होंने विकास को देखा तो वे हैरान रह गए। विकास की छाती में फ्रैक्चर था। परिवार को समझ नहीं आया कि जिस डॉक्टर ने रिपोर्ट देखी, उन्होंने इतनी गंभीर चोट को सामान्य कैसे बता दिया।

15 जुलाई को डॉक्टर से हुई तीखी बहस
15 जुलाई को परिजन वापस हॉस्पिटल पहुंचे और डॉक्टर से सवाल किया कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? आरोप है कि डॉक्टर जगदेव सिंह ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय परिजनों से अभद्रता शुरू कर दी।

डॉक्टर और परिजनों के बीच हुई तीखी बहस
डॉक्टर और परिजनों के बीच हुई इस बहस का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में डॉक्टर चैम्बर के अंदर मरीजों और अन्य लोगों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक होती दिखाई दे रही है।
परिजन ने डॉक्टर से कहा, “डॉक्टर साहब, आपको यह भी पता नहीं चला कि हड्डी टूटी हुई है?”
इस पर डॉक्टर जगदेव सिंह ने जवाब दिया, “मैं पढ़ा हुआ नहीं हूं। मैं तो अनपढ़ हूं।”
महिला परिजन ने कहा, “हां, तुम अनपढ़ ही हो।”
इसके बाद परिजन ने कहा, “डॉक्टर साहब, आप जिला हेडक्वार्टर के हॉस्पिटल में बैठे हैं। आपको इतना तो एहसास होना चाहिए कि आपने क्या काम किया है।”
डॉक्टर जगदेव सिंह ने जवाब दिया, “हां, बैठा हूं। निकाल दो मुझे यहां से बाहर।”
महिला परिजन ने कहा, “हम आपको बाहर क्यों निकालें?”
इसी दौरान वहां मौजूद अन्य मरीज बीच-बचाव करते हुए बोले, “गलती किसी से भी हो जाती है, इंसान ही तो है।”
महिला परिजन ने कहा, “ढंग से बात तो करें। डॉक्टर होकर ऐसी भाषा बोल रहे हैं? एक्स-रे में साफ दिख रहा है कि हड्डी टूटी हुई है, फिर भी आपने कह दिया कि कुछ नहीं है। आपको पता है कि मरीज को कितनी पीड़ा हुई है?”
इसके बाद परिजन ने कहा, “डॉक्टर साहब, आपको थोड़ी बहुत तो शर्म आनी चाहिए।”
डॉक्टर जगदेव सिंह ने जवाब दिया, “नहीं है शर्म। आप दो के ही पास शर्म है क्या?”
परिजन ने कहा, “आप जिला हेडक्वार्टर के हॉस्पिटल में बैठे हैं, कम से कम अपनी जिम्मेदारी तो समझें।”
इस पर डॉक्टर जगदेव सिंह ने कहा, “तुम बैठ जाओ।”
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