मोहर्रम पर युवाओं ने बादशाह कॉलोनी में शरबत पिलाकर इमाम हसन हुसैन को खिराजे -अकीदत पेश की
मोहर्रम पर युवाओं ने बादशाह कॉलोनी में शरबत पिलाकर इमाम हसन हुसैन को खिराजे -अकीदत पेश की
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय पर कृषि उपज मंडी के पीछे मस्जिद अल-हाशमी के आगे ठंडा पेयजल शरबत पिलाया गया आज के दिन मोहर्रम की 10 तारीख (आशूरा) के दिन प्यासों को पानी और शरबत पिलाना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। कर्बला की जंग में पैगंबर हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) के नवासे, हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने भूखे-प्यासे शहादत दी थी। उनकी याद और ईसाले-सवाब की नीयत से लोगों को मीठा पानी या शरबत पिलाना एक नेक और सवाब (पुण्य) का काम है। इसे मुस्लिम समाज में नियाज़ (प्रसाद) के रूप में भी बांटा जाता है।
इस्लाम में ज़रूरतमंदों को खाना खिलाना और प्यासों को पानी पिलाना हमेशा ही बहुत बड़ा सवाब (पुण्य) बताया गया है। मोहर्रम के मौके पर इस नेकी को खास तौर पर किया जाता है ताकि लोगों को हज़रत इमाम हुसैन की कुर्बानी याद रहे। हालांकि, शरबत या खाना बांटते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह ज़रूरतमंदों तक पहुँचे। इसे सिर्फ रस्म या दिखावा न समझकर सच्ची नेकी और परोपकार की भावना से करना चाहिए। इस मौके पर अपनी सेवा दे रहे मुस्लिम खान,शेर मोहम्मद खान, साजिद खान, मारूफ खान,आदिल खान, फरदीन खान, इकराम हुसैन, आरिफ खान, खालिद, आदि मस्जिद इमाम मौलाना कुर्बान अली ने दुआए की।
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