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केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष गूंजी शिक्षकों की पीड़ा, TET अनिवार्यता समाप्त करने की मांग


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केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष गूंजी शिक्षकों की पीड़ा, TET अनिवार्यता समाप्त करने की मांग

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष गूंजी शिक्षकों की पीड़ा, TET अनिवार्यता समाप्त करने की मांग

सीकर : अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर शिक्षकों एवं उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करते हुए इसे शिक्षकों के साथ अन्याय बताया।

प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष संपत सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में सेवाएं दे रहे शिक्षकों की योग्यता पर दोबारा प्रश्न उठाना प्राकृतिक न्याय की भावना के विपरीत है। महासंघ ने इस विसंगति को दूर कर शिक्षकों को राहत देने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने विकसित भारत शिक्षा अधिनियम-2025 को लेकर भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता, शिक्षक हितों की सुरक्षा, अनुसंधान को प्रोत्साहन, करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) में आ रही बाधाओं, पीएचडी शोधार्थियों की समस्याओं तथा शोध अनुदान की कमी जैसे विषयों पर चिंता व्यक्त की।

महासंघ का कहना था कि शिक्षकों और शोधकर्ताओं की समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं होने पर इसका प्रतिकूल प्रभाव देश की शिक्षा व्यवस्था और भावी पीढ़ियों पर पड़ सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत लाखों शिक्षकों के सम्मान, न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और शिक्षक तथा शिक्षा हितों से जुड़े विषयों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

बैठक में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, महामंत्री प्रो. गीता भट्ट, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज कुमार, विद्यालय शिक्षा प्रभारी शिवानंद सिंह सेंगर तथा अतिरिक्त महामंत्री मोहन पुरोहित सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

महासंघ ने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों के सम्मान, अधिकार और न्याय से कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा शिक्षा की गुणवत्ता तभी सुदृढ़ होगी जब शिक्षक स्वयं सम्मान और सुरक्षा का अनुभव करेंगे।

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