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ज़श्न-ए-एजाज़ में तहरीक-ए-उर्दू झुंझुनूं ने 42 प्रतिभाओं का किया सम्मान


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ज़श्न-ए-एजाज़ में तहरीक-ए-उर्दू झुंझुनूं ने 42 प्रतिभाओं का किया सम्मान

ज़श्न-ए-एजाज़ में तहरीक-ए-उर्दू झुंझुनूं ने 42 प्रतिभाओं का किया सम्मान

झुंझुनूं : तहरीक-ए-उर्दू झुंझुनूं की ओर से जिला मुख्यालय स्थित कम्यूनिटी डेवलपमेंट सेंटर में आयोजित “ज़श्न-ए-एजाज़” सम्मान समारोह में शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली 42 शख्सियतों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता इंजीनियर खुर्शीद हुसैन ने की, जबकि सज्जाद हुसैन नूआं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में नव-पदोन्नत प्रधानाचार्यों, प्राध्यापकों, नवचयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों एवं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं का शॉल, माला और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया।

समारोह में अज़ीज़ खान जाबासर, मुमताज़ अली, इरशाद अहमद, शमशाद खान जाबासर, मोहम्मद इब्राहिम खान, मोहम्मद अनीस खान तथा खालिद अख्तर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ नायब सेक्रेटरी इस्माईल खान शेखसर ने तिलावत-ए-कुरआन से किया, जबकि स्वागत भाषण नायब सदर मोहम्मद शरीफ खान जाबासर ने प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि सज्जाद हुसैन नूआं ने अपने संबोधन में उर्दू भाषा की ऐतिहासिक विरासत, शिक्षा और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं अध्यक्षीय उद्बोधन में इंजीनियर खुर्शीद हुसैन ने दीनी और दुनियावी तालीम के संतुलन, इंसानियत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समारोह में नवचयनित एवं पदोन्नत शिक्षाविदों, प्राध्यापकों, प्रधानाचार्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया प्रतिनिधियों सहित कुल 42 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षा, समाज सेवा और उर्दू भाषा के संवर्धन में योगदान देने वाले अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का संचालन तहरीक-ए-उर्दू झुंझुनूं के सदर अशफाक अली ने किया, जबकि सचिव मोहम्मद अयाज खान नूआं ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। अंत में कैप्टन टीपू सुल्तान धनूरी ने दुआ करवाई।

समारोह में शिक्षकों, समाजसेवियों, पूर्व सैनिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। यह आयोजन शिक्षा, उर्दू भाषा और सामाजिक योगदान देने वाली प्रतिभाओं के सम्मान का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

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