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39 साल बाद गोठड़ा में गूंजा शहीद सुमेर सिंह का नाम, प्रतिमा अनावरण के साथ वीरांगना को मिला सम्मान


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39 साल बाद गोठड़ा में गूंजा शहीद सुमेर सिंह का नाम, प्रतिमा अनावरण के साथ वीरांगना को मिला सम्मान

39 साल बाद गोठड़ा में गूंजा शहीद सुमेर सिंह का नाम, प्रतिमा अनावरण के साथ वीरांगना को मिला सम्मान

नवलगढ़ : झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ क्षेत्र के गोठड़ा गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शहीद असिस्टेंट कमांडर-2 सुमेर सिंह शेखावत की प्रतिमा का अनावरण समारोह आयोजित किया गया. समारोह में मुख्य अतिथि विधायक विक्रम सिंह जाखल ने प्रतिमा का अनावरण कर पुष्पांजलि अर्पित की और शहीद की वीरांगना सुमन कंवर और माता चंद्रकंवर का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया.

देशभक्ति केवल शब्द नहीं बल्कि झुंझुनूं के जीवन का संस्कार है- विधायक

विधायक जाखल ने कहा कि झुंझुनूं की धरती वीरों की भूमि है. जहां देशभक्ति केवल शब्द नहीं बल्कि जीवन का संस्कार है. जिले के युवाओं में राष्ट्रसेवा का जज्बा इतना मजबूत है, कि सेना भर्ती के दौरान एक साथ करीब 2500 युवा चयनित होकर देशसेवा के लिए निकलते हैं. ये ही वजह है कि झुंझुनूं का नाम देशभर में सैनिकों की धरती के रूप में सम्मान के साथ लिया जाता है. उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब शहीद सैनिकों के परिवारों तक उनके सामान पहुंचते थे।  लेकिन समय के साथ सैनिक सम्मान की परंपरा और मजबूत हुई है. आज देश अपने वीर जवानों को पूरे सैन्य सम्मान और तिरंगे में लपेटकर अंतिम विदाई देता है. ये बदलाव देश में सैनिकों के सम्मान और सेना के प्रति बढ़ी संवेदनशीलता का प्रतीक है।

विधायक ने कहा कि मजबूत सेना ही मजबूत राष्ट्र का आधार होती है. देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के त्याग और बलिदान की बदौलत ही नागरिक सुरक्षित जीवन जी पाते हैं. उन्होंने युवाओं से राष्ट्रभक्ति, भाईचारे और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया. विधायक जाखल ने कहा कि झुंझुनूं जिले में आए दिन शहीद स्मारकों और प्रतिमाओं के कार्यक्रम इस बात का प्रमाण हैं कि यहां की धरती ने देश को असंख्य वीर सपूत दिए हैं. गांव-गांव में शहीदों की गाथाएं युवाओं को सेना में जाने और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती हैं।

NSG की 13 एसआरजी यूनिट में तैनात थे शहीद सुमेर सिंह शेखावत

शहीद सुमेर सिंह शेखावत के जीवन और शौर्य को कार्यक्रम के दौरान याद किया गया और बताया गया कि सुमेर सिंह शेखावत ने महज 24 वर्ष की आयु में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था. वे नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) की 13 एसआरजी यूनिट में तैनात थे. एनएसजी को देश की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण विशेष सुरक्षा बलों में माना जाता है. जहां चयन और प्रशिक्षण दोनों अत्यंत कठिन होते हैं।

BSF हेलीकॉप्टर हादसे का हुआ था शिकार

शहीद सुमेर सिंह शेखावत के साथी और सेना अधिकारी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह के कार्यक्रम के दौरान झारखंड के गुमला क्षेत्र में एक अभियान पर जाते समय बीएसएफ का हेलीकॉप्टर खराब मौसम के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस दौरान सुमेर सिंह शेखावत ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय दिया और मातृभूमि की सेवा में वीरगति को प्राप्त हुए।

समारोह में कौन कौन रहे मौजूद

समारोह में माधवदास महाराज, गोठड़ा सरपंच अर्जुन वाल्मिकी, एनएसजी कमांडो सुभाषचंद्र सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन मुकेश कुमार ने किया।

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