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डाबला में खनन पट्टे के विरोध में जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों का हंगामा


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डाबला में खनन पट्टे के विरोध में जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों का हंगामा

खनन पट्टों को निरस्त करने की मांग, अतिरिक्त जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अशोक सिंह शेखावत

नीमकाथाना : सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र के ग्राम डाबला में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। खनन पट्टे की पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के संबंध में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया और खनन पट्टा निरस्त करने की मांग उठाई।

ग्रामीणों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए प्लॉट संख्या 67, खसरा संख्या 1778 एवं 795 से संबंधित प्रस्तावित एनओसी को नियम विरुद्ध बताते हुए तत्काल खारिज करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है, जहां खनन गतिविधियों से पर्यावरण, भूजल स्तर, चारागाह भूमि और आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने कई कानूनी एवं तकनीकी आधार प्रस्तुत किए। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के 4 अप्रैल 2016 के आदेश के अनुसार खनन क्षेत्र से मुख्य मार्ग तक पक्की सड़क होना आवश्यक है, जबकि प्रस्तावित स्थल पर ऐसी कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा ग्रामीणों ने राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं अरावली क्षेत्र में खनन संबंधी जारी दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया।

ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम सभा डाबला पहले ही सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर क्षेत्र की गोचर भूमि, पर्यावरण और पहाड़ियों के संरक्षण के लिए किसी भी प्रकार के खनन का विरोध कर चुकी है। उनका कहना है कि ग्राम सभा के वैधानिक प्रस्ताव की अनदेखी कर खनन गतिविधियों को अनुमति देना स्थानीय जनभावनाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत होगा।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित पहाड़ी की ऊंचाई 100 मीटर से अधिक है और यह अरावली पर्वत श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में राज्य की पर्यावरण संरक्षण नीतियों के तहत यहां खनन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। ग्रामीणों ने पूर्व में क्षेत्र में संचालित क्रेशर के कन्वर्जन निरस्त होने का भी उल्लेख करते हुए इसे प्रशासनिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित एनओसी को तत्काल प्रभाव से अस्वीकृत किया जाए, पहाड़ की तकनीकी एवं राजस्व जांच करवाई जाए तथा पर्यावरण और जनहित को ध्यान में रखते हुए खनन पट्टों को स्थायी रूप से निरस्त किया जाए।

जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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