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दादा नवाब क़ायम खां दिवस पर विशेष अंक


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दादा नवाब क़ायम खां दिवस पर विशेष अंक

दादा नवाब क़ायम खां दिवस पर विशेष अंक

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

राजगढ़ : महाराजा वासुदेव के तीसवें, महाराजा अन्ना के उन्नीसवें, जीण माता और हर्ष देव के पिता गंगदेव के अठारवें, गोगा चौहान के चौदह और राव पिथोरा के नवीं पीढ़ी के वंशज राव मोटे राव चौहान के पुत्र महान योद्धा कायमखानी कोम के पूर्वज नवाब कायम खां दादा की शहादत की याद में चौदह जून को कायम खां दिवस मनाया जाता है। नवाब कायम खां और उनके भाई जिन्होंने इस्लाम कुबूल ग्रहण किया,की औलाद कायमखानी कहलाती है। चौहान वंश की देश पर शहीद होने की परंपरा को दादा कायम खां ने जारी रखा जो कायमखानी कोम में आज तक चली आ रही है। दादा कायम खां और उनकी कायमखानी कोम ने कभी तुगलक परिवार के लिए, कभी राणा सांगा के लिए, कभी विश्व युद्ध में देश के लिए और कभी भारत पाकिस्तान युद्ध,भारत चीन युद्ध, ऑपरेशन कारगिल, ऑपरेशन पराक्रम या आतंकियों से लोहा लेने हेतु देश के लिए अपनी जान कुर्बान की हैं जिसके सबूत इस छोटी संख्या वाली कॉम के पास छ वीर चक्र है। इन शहीदों की फेहरिस्त क़ायम खां की जन्मस्थली ददरेवा में बने नवाब कायम खां मेमोरियल शहीद स्मारक (निशान ए कायम) में देखी जा सकती है।

इस्माईल कायमखानी, (सेवानिवृत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक)
सदस्य-महाराज श्री उम्मेद सिंह कायमखानी गर्ल्स हॉस्टल निर्माण समिति जोधपुर।
वरिष्ठ महासचिव-राजस्थान सेवानिवृत पुलिस कल्याण संस्थान।

कायम खां के वंशज मोहम्मद खां ने झुझा जाट के नाम पर झुंझुनूं शहर बसाया और फतेह खां ने फतेहपुर शहर बसाया और इनके वंशजों ने झुंझुनूं और फतहपुर में हजारों बीघा बीहड़ गायों के विचरण के लिए छोड़ कर इतिहास रचा। आज से साठ सत्तर साल पहले चौदह जून को कायम खां दिवस मनाने की परंपरा सर्व प्रथम मेरे पिताजी स्वर्गीय हाजी बाबू हिदायत खां साहब ने की थी। बाबू हिदायत खांजी उस समय मौजीज कायमखानियों को पोस्ट कार्ड लिख कर कायम खांजी का शहादत दिवस मनाने की ताकीद करते थे जिससे लोग उनको पोस्टकार्ड वाले बाबूजी कहने लग गए थे।इस संबंध में पहला बड़ा यौमे शहादत दिवस कार्यक्रम भादरा के कायमखानी बास मदरसा में भामाशाह मरहूम हाजी आलम अली खां ने आयोजित करवाया था जिसमें भादरा के मुख्य लोगों के साथ मरहूम बाबू हिदायत खां, मशहूर शायर मरहूम मंसूर साहेब, मशहूर शायर मरहूम सालिक अजीजी साहेब भी सम्मिलित हुए थे l

जब में पांचवीं कक्षा में था तब 1975 मैं मेरे पिताजी मुझे ददरेवा ले गए और बताया कि यहां हमारे दादा कायम खां, जेनदी खां और जबरदी खां की पैदाईश हुई थी और उनके जन्म की थालियां इसी गांव में बजी थी। ददरेवा हम कायमखानियों के लिए केन्द्र बिंदु है आज यहां फतेहा पढ़ेंगे। इसी मंशा से इस केंद्र बिंदु ददरेवा में कायम खां मेमोरियल शहीद स्मारक निशान ए कायम बनाया गया है कि तीनों दादाओं की थाली इसी गांव में बजी थी। जब स्मारक बनाने की बात चल रही थी तब कुछ लोगों ने ददरेवा में स्मारक बनाने का का विरोध भी किया था (जिनमें से एक आज बड़े नेता है) कि जब यहां कोई कायमखानी रहता ही नहीं है तो स्मारक यहां क्यों बना रहे हो ? लेकिन मंत्री युनुस खां, मरहूम खान साहेब, मरहूम बाबू हिदायत खां साहब और पार्षद भंवर खां और समाज के मौजीज लोगों ने ददरेवा में ही स्मारक बनाना तय किया। स्मारक की स्वीकृति, भू आवंटन और निर्माण में माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया और कैबिनेट मंत्री युनुस खां की भूमिका प्रमुख और महत्वपूर्ण रही है।और इस बात को भूला नहीं जा सकता कि आरक्षण आंदोलन के कारण राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति के बावजूद वसुंधरा मैडम स्मारक के उद्घाटन में सम्मिलित हुई। इसके लिए पूरी कायमखानी कोम वसुंधरा राजे सिंधिया और युनुस खां की हमेशा आभारी रहेगी। हर वर्ष की भांति ददरेवा में इस वर्ष भी चौदह जून को कायम खां का यौमे शहादत मनाया जाकर खिराजे अकीदत पेश की जाएगी । – इस्माईल कायमखानी, (सेवानिवृत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक), सदस्य-महाराज श्री उम्मेद सिंह कायमखानी गर्ल्स हॉस्टल निर्माण समिति जोधपुर।, वरिष्ठ महासचिव-राजस्थान सेवानिवृत पुलिस कल्याण संस्थान।

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