देश के क्रांतिकारियों को जातियों में बांटना बंद करें:वे पूरे राष्ट्र के गौरव हैं; चंद्रशेखर आजाद के प्रपौत्र अमित आजाद बोले- ‘रील्स और लाइक्स’ की दुनिया में भटक रहा युवा
देश के क्रांतिकारियों को जातियों में बांटना बंद करें:वे पूरे राष्ट्र के गौरव हैं; चंद्रशेखर आजाद के प्रपौत्र अमित आजाद बोले- 'रील्स और लाइक्स' की दुनिया में भटक रहा युवा
झुंझुनूं : अमर शहीद पंडित चंद्रशेखर आजाद के प्रपौत्र अमित आजाद ने देश में महापुरुषों और क्रांतिकारियों को जातियों के आधार पर बांटने की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी किसी एक समाज, जाति या वर्ग के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों को जातीय दायरों में सीमित करना उनके बलिदान और विचारों का अपमान है।
झुंझुनूं प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में अमित आजाद ने कहा कि आजादी के लिए हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर करने वाले वीरों ने कभी जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर संघर्ष नहीं किया। उनका लक्ष्य केवल एक स्वतंत्र, मजबूत और अखंड भारत का निर्माण था।
‘शहीदों को जातियों में बांटना दुर्भाग्यपूर्ण’
अमित आजाद ने कहा कि आज राजनीतिक और सामाजिक स्वार्थों के चलते महापुरुषों को जातिगत पहचान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान जैसे क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया था। उन्होंने कहा, “जब इन महान क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया, तब उनके मन में किसी जाति, वर्ग या मजहब की भावना नहीं थी। उनका एकमात्र उद्देश्य भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराना था।”
युवा सोशल मीडिया की दुनिया में उलझ रहे
देश की युवा शक्ति पर बात करते हुए अमित आजाद ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं की सबसे बड़ी चुनौती सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रभाव है। उन्होंने कहा कि युवाओं का बड़ा वर्ग रील्स, लाइक्स और फॉलोअर्स की आभासी दुनिया में उलझता जा रहा है।
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और राष्ट्र के वास्तविक मुद्दों को समझने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा केवल मोबाइल स्क्रीन तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, नवाचार, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में लगानी चाहिए।
केवल नारे नहीं, विचारों को भी अपनाएं
अमित आजाद ने कहा कि युवाओं को केवल महापुरुषों के जयकारे लगाने या उनकी तस्वीरें साझा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें उनके जीवन संघर्ष, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और आदर्शों को भी समझना और अपने जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के सामने आज कई सामाजिक और वैचारिक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए युवाओं का जागरूक, शिक्षित और जिम्मेदार होना जरूरी है।
झुंझुनूं की वीर भूमि को किया नमन
राजस्थान और विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए अमित आजाद ने कहा कि झुंझुनूं की धरती वीरों और शहीदों की भूमि रही है। यहां के सैनिकों और जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अनेक बलिदान दिए हैं। उन्होंने कहा कि झुंझुनूं की मिट्टी में देशभक्ति की खुशबू बसती है और इस वीर भूमि पर आकर उन्हें विशेष गर्व और ऊर्जा का अनुभव हुआ है।
युवाओं में राष्ट्र चेतना जगाने की मुहिम
अमित आजाद ने बताया कि उनका परिवार और संगठन देशभर में युवाओं के बीच राष्ट्र चेतना जागृत करने का अभियान चला रहा है। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक मंचों पर जाकर नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक इतिहास और क्रांतिकारियों के जीवन संघर्षों से परिचित कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य युवाओं में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को मजबूत करना और उन्हें देश के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराना है। झुंझुनूं पहुंचने पर स्थानीय नागरिकों और युवाओं ने अमित आजाद का स्वागत किया। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और युवा भी मौजूद रहे।
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