इस्लामपुर नाम बदलने के विरोध में 15 जून को पैदल मार्च:गुढ़ा बोले- कोशिश हुई तो बड़ा आंदोलन करेंगे, 1904 से 1951 तक के दस्तावेज दिखाए
इस्लामपुर नाम बदलने के विरोध में 15 जून को पैदल मार्च:गुढ़ा बोले- कोशिश हुई तो बड़ा आंदोलन करेंगे, 1904 से 1951 तक के दस्तावेज दिखाए
झुंझुनूं : इस्लामपुर गांव का नाम बदलने की चर्चाओं के बीच विरोध तेज हो गया है। पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने मंगलवार को झुंझुनूं के अंबेडकर भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि इस्लामपुर का नाम नहीं बदला जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार या प्रशासन ने नाम परिवर्तन की कोशिश की तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।
15 जून को निकलेगा पैदल मार्च
गुढ़ा ने इस दौरान 15 जून को इस्लामपुर से झुंझुनूं कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सुबह 6 से 7 बजे के बीच ग्रामीण गांव से रवाना होंगे और करीब 14 से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे। वहां जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में कलेक्ट्रेट के सामने धरना देने की भी चेतावनी दी गई।

बोले- इतिहास और पहचान से जुड़ा है गांव का नाम
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुढ़ा ने कहा कि इस्लामपुर केवल एक गांव का नाम नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास और सामाजिक विरासत की पहचान है। उन्होंने कहा कि यहां के पठान समुदाय ने शेखावाटी के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पूर्वजों के साथ मिलकर उन्होंने कई लड़ाइयों में हिस्सा लिया और हर सुख-दुख में साथ खड़े रहे।
उन्होंने कहा कि राव शेखा के समय भी पठानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। ऐसे में गांव के नाम को बदलने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पूरी शेखावाटी इस मुद्दे पर इस्लामपुर के लोगों के साथ खड़ी है।
प्रशासन चाहे तो करवा ले मतदान
गुढ़ा ने कहा कि यदि नाम को लेकर किसी तरह का विवाद है तो प्रशासन पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो गांव में मतदान कराकर भी लोगों की राय जानी जा सकती है। लोकतंत्र में जनता की इच्छा का सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि नाम परिवर्तन जैसे मुद्दों से मुस्लिम समाज में चिंता का माहौल बना है। विकास कार्यों पर ध्यान देने के बजाय पहचान से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए पुराने दस्तावेज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इब्राहिम खान ने इस्लामपुर नाम से जुड़े पुराने दस्तावेज मीडिया के सामने प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से पुराने रिकॉर्ड मांगे गए थे, जिसके बाद विभिन्न दस्तावेज एकत्र किए गए।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1904 की एक पुस्तक में इस्लामपुर गांव का नाम दर्ज है। इसके अलावा 1943 और 1951 के स्कूल रिकॉर्ड तथा 1946 के एक आर्मी डिस्चार्ज पेपर में भी इस्लामपुर नाम का उल्लेख मिलता है। उनका कहना था कि ये दस्तावेज गांव की ऐतिहासिक पहचान को प्रमाणित करते हैं।

विधायक और भाजपा पर साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुढ़ा ने स्थानीय विधायक और भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विकास, रोजगार, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं जैसे मुद्दों पर काम करने की जरूरत है, लेकिन नाम बदलने जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है।
वहीं RLP नेता राजेंद्र फौजी ने कहा कि केवल नाम बदलने की राजनीति से क्षेत्र का विकास नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 15 जून के प्रदर्शन में RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल को भी आमंत्रित किया जाएगा।
गांव के लोग बोले- नाम परिवर्तन नहीं होने देंगे
सरपंच अमीन मनियार ने कहा कि गांव के सभी समुदाय इस मुद्दे पर एकजुट हैं और नाम परिवर्तन का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। 15 जून को बड़ी संख्या में ग्रामीण झुंझुनूं पहुंचकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरपंच अमीन मनियार, RLP नेता राजेंद्र फौजी, इब्राहिम खान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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