‘गौमाता’ के सम्मान में एक हुए दिल माण्डेला छोटा में उमड़ा आस्था और भाईचारे का सैलाब
गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने को लेकर उठी मांग...
जनमानस शेखावाटी न्यूज : आबिद खान
फतेहपुर : अमूमन हम खबरों में दूरियां और दीवारें देखते हैं, लेकिन रविवार को माण्डेला छोटा गांव की सड़कों ने जो मंजर देखा, उसने हर आंख को नम और हर दिल को गर्व से भर दिया। गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग को लेकर जब गांव के मुस्लिम समाज और ग्रामीणों ने मिलकर कदम बढ़ाए, तो ऐसा लगा मानो पूरा हिंदुस्तान एक सुर में बोल रहा हो।
यह सिर्फ एक जागरूकता रैली नहीं थी, यह हमारी सदियों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब और कौमी एकता का जीता-जागता प्रतीक थी।
कंधे से कंधा मिलाकर चले कदम
’टीम अरशद माण्डेला’ के नेतृत्व में जब इस रैली का आगाज हुआ, तो नफरतों की दीवारें ढह गईं और सिर्फ और सिर्फ ‘गौ संरक्षण’ और ‘सम्मान’ का भाव बाकी रह गया। बुजुर्गों के चेहरों का तजुर्बा और युवाओं का जोश मिलकर एक ही संकल्प दोहरा रहे थे-गाय सिर्फ एक पशु नहीं, हमारी संस्कृति की आत्मा है।

इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनते हुए सूबेदार बशीर खां, पूर्व सरपंच इरशाद खान, नेमीचंद धायल, सूबेदार अजीम खां, अजीज जमालखानी, मुबारिक खान, शाहरुख माण्डेला, बसंत शर्मा, रामकुमार धायल, रामलाल तेतरवाल, साहिल, तौफीक, दिलशाद, अरबाज, मुमताज खां भाटी और शफीक भाटी सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने इस मुहिम को अपने आंसुओं और दुआओं से सींचा।
”यह शुरुआत है एक बड़े बदलाव की…”
रैली को संबोधित करते हुए शाहरुख माण्डेला की आवाज में एक गहरा संकल्प और भावुकता थी। उन्होंने कहा: ”यह अभियान सिर्फ हमारे गांव की गलियों तक सीमित नहीं रहेगा। यह चिंगारी अब हर गांव, हर घर तक पहुंचेगी। आने वाली 8 तारीख को जब हम फतेहपुर उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे, तो उसमें सिर्फ हमारी मांग नहीं, बल्कि इस माटी के हर इंसान की धड़कन शामिल होगी।” और आवाज सिर्फ गायों की रक्षा की होगी
सौहार्द की एक नई इबारत
वक्ताओं ने जब बोलना शुरू किया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। मुस्लिम समाज के युवाओं द्वारा शुरू की गई इस पवित्र पहल की हर किसी ने खुले दिल से सराहना की। लोगों ने कहा कि आज जब दुनिया बांटने की बातें करती है, तब हमारे युवाओं ने गाय के सम्मान के लिए एकजुट होकर पूरे देश को सामाजिक सौहार्द और मोहब्बत का सबसे खूबसूरत पैगाम दिया है।
एक संदेश एक आवाज:
माण्डेला छोटा ने साबित कर दिया कि जब इरादे नेक हों और दिलों में एक-दूसरे के प्रति सम्मान हो, तो हर राह आसान हो जाती है। गौमाता को उनका हक दिलाने का यह सफर अब रुकने वाला नहीं है!
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