फतेहपुर में मीडिया टीम पर हमला, सच दिखाने पर पत्रकारों को बंधक बनाने और मारपीट का आरोप!
धानुका अस्पताल में मीडिया टीम पर पीएमओ सहित डॉक्टरों ने चलाए लात घुस्से..? पत्रकारों को बनाया बंधक.. पत्रकारों ने कोतवाली थाना में दर्ज करवाई शिकायत...पत्रकारों ने इसी हफ्ते किया था धानुका अस्पताल की अनियमितताओं पर स्टिंग ऑपरेशन...
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान/अनिल शेखीसर
फतेहपुर : न्यूज भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बेनकाब करने वाली मीडिया टीम के साथ फतेहपुर में गंभीर बदसलूकी का मामला सामने आया है। धानुका अस्पताल में कवरेज करने गई जनमानस शेखावाटी न्यूज की टीम ने अस्पताल के पीएमओ डॉ. सुभाष महला, और उनके सहयोगी कई डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मीडिया टीम के आबिद खान और अनिल शेखिसर ने बताया कि अस्पताल में कवरेज के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जातिसूचक गालियां दी गईं, मारपीट की गई लात घुसे चलाए गए और उन्हें एक कमरे में बंधक बनाकर रखा गया। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज को दबाने का एक निंदनीय प्रयास है।

स्टिंग ऑपरेशन की बौखलाहट में हुआ हमला?
यह पूरा घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे गहरी नाराजगी मानी जा रही है। इसी हफ्ते ही पत्रकार आबिद खान और अनिल शेखीसर ने धानुका अस्पताल की कथित अनियमितताओं को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। जिसमे उन्होंने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए यह खुलासा किया था कि कई सरकारी डॉक्टर बाहर निजी तौर पर ऑपरेशन करने के खेल में शामिल हैं। और जनता से मोटा पैसा ले रहे हैं तो वही दूसरी और डॉक्टर्स ड्यूटी से गायब रहते हैं।
चर्चा है कि अपनी कमियों और काले कारनामों के उजागर होने से बौखलाए अस्पताल प्रशासन ने अपनी गलती सुधारने के बजाय मीडिया की आवाज को रोकने के लिए यह हिंसक रास्ता चुना।

वीडियो सबूत सुरक्षित, पुलिस जांच में जुटी
पत्रकारों का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम और बदसलूकी के पुख्ता वीडियो सबूत उनके हिडन केमरे में दर्ज हुए हैं। जनमानस शेखावाटी न्यूज के हेड ऑफिस में पूरी तरह सुरक्षित हैं।
घटना की भनक लगते ही कोतवाली थाना पुलिस का जब्त तीन गाड़ियां लेकर धानुका अस्पताल पहुंची और कमरे में बंधक बनाई गई मीडिया टीम को वहां से बाहर निकालकर थाने लेकर आई। पत्रकारों ने बिना किसी देरी के कोतवाली थाना फतेहपुर के एसआई ईश्वर सिंह को लिखित परिवाद सौंपकर पीएमओ सुभाष महला और कई डॉक्टरों के खिलाफ सख्त एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

पत्रकारों और आमजन में भारी आक्रोश
इस घटना के बाद से पूरे शहर के पत्रकारों, सामाजिक संगठनों और आम जनता में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। लोकतंत्र में सच दिखाने वालों पर इस तरह का हमला किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
अब सबकी निगाहें कोतवाली पुलिस की जांच और आगामी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रशासन को बिना किसी दबाव के इन दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में कोई भी सच को दबाने की हिम्मत न कर सके।
फिलहाल सोशल मीडिया पर धानुका अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ भारी आक्रोश हैं। सोशल मीडिया यूजर्स और आमजन के द्वारा सोशल मीडिया पर ट्रेंड चल रहा हैं कि पत्रकारों पर हमला करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जल्द ही बड़ा आंदोलन किया जाए।
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