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नाबालिग से कुकर्म के दोषी को 20 साल जेल:1 लाख रुपए का जुर्माना, डरा-सहमा रहता था मासूम


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नाबालिग से कुकर्म के दोषी को 20 साल जेल:1 लाख रुपए का जुर्माना, डरा-सहमा रहता था मासूम

नाबालिग से कुकर्म के दोषी को 20 साल जेल:1 लाख रुपए का जुर्माना, डरा-सहमा रहता था मासूम

झुंझुनूं : झुंझुनूं के पॉक्सो एक्ट) न्यायालय ने नाबालिग बालक के साथ अनैतिक कृत्य और कुकर्म करने के एक गंभीर मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी को 20 वर्ष के जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 1,00,000 (एक लाख) रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

​दो बार बालक को बनाया शिकार

26 मार्च 2025 को पीड़ित बालक की माता (परिवादिया) ने थाने में उपस्थित होकर अभियुक्त के खिलाफ नामजद लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ​पहली घटना (5 सितंबर 2023) की है। घटना के समय पीड़ित बालक की उम्र मात्र 14 वर्ष 10 महीने थी। जब वह स्कूल जा रहा था, तब अभियुक्त ने उसे रास्ते में रोक लिया।

वह बालक को बहला-फुसलाकर अपनी गाड़ी में बैठाकर एक धर्मशाला में ले गया, जहां उसने मासूम के साथ अनैतिक कृत्य (कुकर्म) किया। इसके बाद आरोपी ने किसी को भी यह बात बताने पर बालक को जान से मारने की धमकी दी। ​दूसरी घटना (27 जनवरी 2025) की है। पीड़ित बालक जब बाजार से घर का सामान लेने गया, तो अभियुक्त ने उसे दोबारा डरा-धमकाकर अपनी गाड़ी में बंधक बना लिया और उसके साथ फिर से घिनौना काम किया।

​इस लगातार उत्पीड़न, शोषण और जान से मारने की धमकी की वजह से मासूम बालक अंदर ही अंदर डरा-सहमा रहने लगा। जब उसकी माता ने बालक की मानसिक स्थिति भांपकर उससे कड़ाई और प्यार से पूछताछ की, तब जाकर बालक ने रोते हुए अपने साथ हुई इस पूरी आपबीती को बयां किया। ​न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को बेहद मजबूती और वैज्ञानिक तरीके से कोर्ट के सामने रखा। इस जघन्य केस को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा ​कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए, जिन्होंने घटना की पुष्टि की।

​कुल 48 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रदर्शित कराए गए। ​पत्रावली पर आए इन सबूतों, चिकित्सीय साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने माना कि अभियुक्त ने नाबालिग के बचपन को बेरहमी से कुचला है और वह किसी भी रहम का हकदार नहीं है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने और पत्रावली का बारीकी से अध्ययन करने के बाद अभियुक्त को पोक्सो अधिनियम की धाराओं में कड़े कारावास से दण्डित किया। प्रकरण में राज्य सरकार (अभियोजन पक्ष) की तरफ से पैरवी विशिष्ट लोक अभियोजक सुरेन्द्र सिंह भाम्बू द्वारा की गई।

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