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सवाल:क्या प्रशासनिक तौर पर ‘अनाथ’ हो चुका है फतेहपुर? स्टिंग में खुली अधिकारियों की पोल-कहीं सोफे पर आराम, कहीं कुर्सियां खाली,


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सवाल:क्या प्रशासनिक तौर पर ‘अनाथ’ हो चुका है फतेहपुर? स्टिंग में खुली अधिकारियों की पोल-कहीं सोफे पर आराम, कहीं कुर्सियां खाली,

पैरों में उपस्थिति रजिस्टर रखकर सोफे पर लेटे मिले शिक्षा के सीबीईओ! पीएचईडी की ग्रामीण एईएन सिटी ऑफिस में ‘अठखेलियां’ करती मिलीं - सवाल पूछने पर बोलीं “आप कौन होते हो?”

धानुका में ड्यूटी चार्ट से गायब डॉक्टरों के नाम.. अस्पताल में बदबू और निजी क्लीनिकों की चमक! सीट से मिले डॉक्टर गायब… 

आयुक्त मैडम की गाड़ी बाहर… ऑफिस पर ताला अंदर! कर्मचारी बोला – “मैं ही आयुक्त हूं!”

दान से लगी एसी चालू छोड़ गायब अधिकारी… कहीं पंखों के नीचे नींद में मशगुल कर्मचारी!

 

जनमानस शेखावाटी न्यूज आबिद खान/अनिल शेखीसर की ‘ग्राउंड जीरो’ से विशेष रिपोर्ट

फतेहपुर : पारा 45 डिग्री के पार है। आसमान से आग बरस रही है और धरती तवे की तरह तप रही है। इस जानलेवा गर्मी में आम जनता पानी की एक-एक बूंद, बिजली की एक-एक करवट और अस्पताल में एक अदद डॉक्टर की कशिश के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है। सरकारें आती हैं, बड़े-बड़े वादे करती हैं और सत्ता के सिंहासन पर बैठ जाती हैं। लेकिन राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर में सिस्टम की जो तस्वीर हमारे ब्यूरो चीफ आबिद खान और अनिल शेखीसर ने अपनी जान जोखिम में डालकर, इस तपती धूप में निकाली है, उसे देखकर आप शर्मिंदा भी होंगे और आक्रोशित भी।

यह कोई सामान्य रिपोर्ट नहीं है, यह फतेहपुर के उस ‘प्रशासनिक ढांचे’ का कच्चा चिट्ठा है, जहां जनता को रामभरोसे छोड़कर अधिकारी या तो ‘अठखेलियां’ कर रहे हैं या एसी की ठंडी हवा में खर्राटे मार रहे हैं।

पीएचईडी का ‘पारिवारिक’ तमाशा: मैडम सीट से गायब, सिटी ऑफिस में मोबाइल पर अठखेलियां!

जनता प्यासी है, लेकिन ग्रामीण पीएचईडी की सहायक अभियंता सोनू कुमारी को जनता के हलक के सूखे की कोई परवाह नहीं है। हमारी टीम जब उनके दफ्तर पहुंची, तो कुर्सी वीरान थी। खोजबीन की गई तो मैडम पीएचईडी के सिटी ऑफिस में सहायक अभियंता प्रिया दर्शना के चेंबर में बैठकर आराम से मोबाइल चला रही थीं।

जब हमारी टीम ने सवाल किया कि “मैडम, आप अपनी सीट पर क्यों नहीं थे?” तो जवाब मिला “आप कौन होते हो पूछने वाले? मैं कहीं भी बैठूं, आपको क्या लेना-देना?” जबकि मेडम सिटी ऑफिस में जाकर वहां बैठकर सिटी ए ई एन प्रिय दर्शना के साथ अठखेलियां कर रहे थे जिनका साक्ष्य हमारी टीम के पास सुरक्षित हैं।

अपना दफ्तर छोड़ दूसरे दफ्तर अठखेलियां करती एईएन सोनू कुमारी

कमाल का रसूख है!

पता चला कि वाटर बॉक्स की सहायक अभियंता सोनू कुमारी जी नगर परिषद के सहायक अभियंता विवेक की धर्मपत्नी हैं। और पतिदेव का हाल सुनिए वह भी अपने दफ्तर से नदारद थे! जब पूरा परिवार ही सरकारी कुर्सियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ या ‘वर्क फ्रॉम अनदर केबिन’ बना ले, तो जनता पानी के लिए तरसेगी नहीं तो क्या करेगी?

शिक्षा विभाग के रखवाले: पैरों में उपस्थिति रजिस्टर, सोफे पर सीबीईओ साहब की नींद!

राष्ट्र के निर्माताओं और बच्चों के भविष्य को सुधारने का जिम्मा जिन सीबीईओ नरेंद्र सिंह पर है, वे खुद सोफे पर सुस्ता रहे थे। और पैरो में उपस्थिति रजिस्टर रखा था जब हमारी टीम अचानक उनके दफ्तर में दाखिल हुई, तो नजारा अद्भुत था *उपस्थिति रजिस्टर साहब के पैरों में पड़ा था और साहब सोफे पर ‘पॉवर नैप’ ले रहे थे।

पैरों में रजिस्टर रखकर आराम फरमाते शिक्षा के सीबीईओ

पत्रकारों के कैमरे चमकते ही साहब हड़बड़ा कर अपनी सीट की तरफ भागे और लाज बचाते हुए बोले “मैं तो… मैं तो.. मैं तो.. फोन पर बात कर रहा था।” साहब, पैरों में रजिस्टर रखकर फोन पर कौन सी गुप्त मंत्रणा हो रही थी, यह फतेहपुर की जनता बखूबी समझती है।

आयुक्त मेडम की ‘कलाकारी’: गाड़ी बाहर, अंदर आफिस पर ताला, और एक मिला एक अदृश्य ‘आयुक्त’!

नगर परिषद फतेहपुर पहुंची टीम को लगा कि आयुक्त अनीता खीचड़ मैडम अंदर ही हैं, क्योंकि उनकी सरकारी गाड़ी बाहर चमचमा रही थी। लेकिन चेंबर के पास पहुंचते ही ‘सिस्टम का ताला’ लटका मिला। तभी वहां मौजूद एक शख्स ने सीना तानकर कहा
आपका क्या काम है मुझे बताओ, मैं ही आयुक्त हूं, मैं करवा दूंगा, आप तो काम बोलो!”
तो वही सहायक अभियंता विवेक और कनिष्ट अभियंता नगर परिषद भी सीट से नदारद थे
क्या बात है! फतेहपुर नगर परिषद में अब कोई भी राह चलता खुद को आयुक्त घोषित कर देता है। थोड़ा और आगे बढ़े तो:
योजना शाखा: दरवाजा टूटा हुआ था, कंप्यूटर ऑन, लाइट-पंखा चालू, लेकिन इंसान गायब!
स्थापना शाखा: में एसी, लाइट, पंखे पूरी रफ्तार में चल रहे थे, बाबू गायब थे। हमारी टीम को देखकर एक-दूसरे को फोन मिलाकर कानाफूसी करने लगे।

आयुक्त के चेंबर के लगा ताला
आयुक्त की कार ऑफिस में आयुक्त गायब

25 लाख का टेंडर: कुत्तों का अड्डा बना परिषद
जिस नगर परिषद में आवारा कुत्तों को हटाने या व्यवस्था सुधारने के लिए लाखों के टेंडर होते हैं, वहां खुद आवारा कुत्तों ने अपना हेडक्वार्टर बना रखा था। और कई आवारा कुत्ते घूमते नजर आए।

बीडीओ साहब का खौफ: “सरकार के खिलाफ नहीं बोलूंगा, अधूरी नंबर प्लेट की गाड़ी से निकले घर की तरफ”

पंचायत समिति कार्यालय की बिल्डिंग जर्जर है, कभी भी ढह सकती है। जब हमारी टीम ने बीडीओ नरेंद्र सिंह से इस पर जवाब मांगा, तो उन्होंने बड़ी चालाकी से पल्ला झाड़ लिया मैं मेरी सरकार के खिलाफ नहीं बोल सकता, आप जाइए।”

हद तो तब हो गई जब थोड़ी देर बाद बीडीओ साहब अपनी अधूरी और जर्जर नंबर प्लेट वाली सरकारी गाड़ी से घर जाते दिखे। जब कानून के रखवाले से पूछा कि गाड़ी की नंबर प्लेट अधूरी क्यों है, तो हंसते हुए बोले “मैं लोकल में ही आसपास चलता हूं, कोई दिक्कत नही होती बाकी देख लेंगे।” वाह साहब! आम आदमी की गाड़ी पर जुर्माना और आपकी गाड़ी के पुलिस की खुली छूट

धानुका अस्पताल: “दो बजने वाले हैं, अब मरीज क्या देखेंगे? – डॉक्टर पूर्णमल

45 डिग्री की गर्मी में जब बीमार जनता धानुका अस्पताल पहुंचती है, तो उन्हें डॉक्टर नहीं, बदबू मिलती है। दोपहर 1:41 बजे डॉक्टर पूर्णमल अपनी सीट से गायब थे। हमारी टीम ने जब मरीज बनकर उन्हें फोन किया, तो डॉक्टर साहब का संवेदनहीन जवाब था दो बजने वाले हैं, अब क्या ही मरीज देखें! सूत्रों ने बताया कि साहब का ध्यान सरकारी अस्पताल से ज्यादा पास ही चल रहे उनके निजी क्लीनिक पर रहता है।

यही हाल बच्चों के डॉक्टर आर. एन. जाट का था। वे भी गायब थे। मरीज का अटेंडर बनकर पत्रकारों ने फोन किया तो बोले “लाइफ लाइन हॉस्पिटल के पास आईसीआईसीआई बैंक के पास मेरा क्लीनिक है, वहां आकर दिखा लेना।”

अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर:
जनरल वार्ड के बाथरूम में इतनी भयंकर बदबू थी कि मरीजों का सांस लेना दूभर था। दरवाजे टूटे थे, वॉशबेसिन गंदगी से अटे पड़े थे। और मरीज मुंह पर कपड़ा बांधकर लेटने को मजबूर हैं। यह अस्पताल है या नारकीय यातना गृह? जहां इलाज कम बीमारी ज्यादा फैलाई जा रही हैं।

गंदगी का अंबार
धानुका में टूटा हुआ दरवाजा

बिजली विभाग और पीडब्ल्यूडी: दान के एसी पर ऐश, जनता त्रस्त

दोपहर 3 बजे बिजली विभाग के एक्सईएन के दफ्तर में सन्नाटा था। कर्मचारियों ने कहा साहब के घर जाने का समय हो गया।” सिटी कार्यालय में जेईएन गायब, मिला पंखे लाइट चालू मिले तो ग्रामीण कनिष्ठ अभियंता के बगल वाले दफ्तर में एक कर्मचारी मानो जैसे घोड़े बेचकर गहरी नींद सो रहा था। जब मीडिया ने जगाया, तो वहां घूम रहे ठेकेदार मीडिया से ही आई-कार्ड मांगने लगे ताकि चोरी पकड़ी न जाए।

पीडब्ल्यूडी का हाल बे हाल दोपहर 2:54 बजे एक्सईएन और एईएन दोनों गायब थे। दान में मिला एसी चालू
जब टीम पीडब्ल्यूडी दफ्तर पहुंची तो दान मिले एसी ने पूरी ताकत से खाली चेंबर को ठंडा कर रखा था। और एक्सईएन और एईएन सीट से नदारद थे पूछने पर वहां मौजूद कथित बाबू ने तीन रंग के झूठ बोले पहले कहा सर बाहर गए हैं, फिर बोला आए ही नहीं, फिर बोला बात करवाता हूं।

उम्मीद की इकलौती किरण: बने ग्रामीण एईएन दिनेश मीणा और नगर परिषद की सीमा जांगिड़

इस पूरे प्रशासनिक अंधेरगर्दी के बीच बिजली विभाग के ग्रामीण कार्यालय के सहायक अभियंता दिनेश मीणा अपने चेंबर में मुस्तैदी से डटे मिले। वे तपती दोपहर में एक आम उपभोक्ता की फाइल का निस्तारण कर रहे थे। तो वही नगर परिषद की वरिष्ठ प्रारूपकार के ऑफिस में सीमा जांगिड़ आमजन की समस्याओं का निस्तारण करते हुए नजर आई जनमानस शेखावाटी न्यूज ऐसे दोनो कर्तव्यनिष्ठ अधिकारीयो को सलाम करता है, जो इस सड़े हुए सिस्टम में फतेहपुर में अकेले ईमानदारी का दीया जलाए बैठे हैं। और गैरजिम्मेदार और लापरवाह अधिकारियों को आइना दिखाने का काम कर रहे हैं।

सवाल जिनका जवाब तो देना होगा!

*जनमानस शेखावाटी न्यूज* के जांबाज पत्रकारों ने 45 डिग्री की उस झुलसा देने वाली गर्मी में अपनी सुख-सुविधाओं को छोड़कर जनता के हक के लिए यह सच सामने लाया है। लेकिन इस स्टिंग के बाद कुछ कड़े सवाल सिस्टम के मुंह पर तमाचा मार रहे हैं:

आयुक्त और एईएन महोदय: जब पत्रकारों ने इस लापरवाही पर आपका पक्ष जानना चाहा, तो आपने फोन उठाना उचित क्यों नहीं समझा? क्या जनता के प्रति आपकी कोई जवाबदेही नहीं है?

माननीय मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर महोदय:
क्या फतेहपुर को वाकई अधिकारियों के भरोसे ‘अनाथ’ छोड़ दिया गया है? क्या दफ्तरों में चल रही यह ‘अठखेलियां’ और ‘सोफे की नींद’ आपके सुशासन के दावों का हिस्सा हैं?

डॉक्टर साहबान और सीएमएचओ से सवाल:
सरकारी तनख्वाह लेकर निजी क्लीनिक चमकाने का यह धंधा कब बंद होगा? तड़पते हुए मरीजों को “दो बजने वाले हैं अब क्या देखें” कहना किस मेडिकल एथिक्स के तहत आता है?

बिजली और पीडब्ल्यूडी के साहब:
जनता बिजली कटौती से परेशान है और आपके दफ्तरों में खाली कुर्सियों के लिए सरकारी बिजली और दान के एसी फूंक जा रहे हैं, इसका बिल कौन भरेगा? क्या यही आपकी जिम्मेदारी हैं।

पीएचईडी की सोनू कुमारी से सीधा सवाल
भले ही आपको मीडिया को धमकाने की कला में महारत हासिल हैं मगर मेडम जनता एक एक बूंद के लिए तरस रही हैं और आप पास के ऑफिस में अठखेलियां करती नजर आ रही हैं क्या ट्रेनिंग के दौरान आपने ये ही सीखा हैं।

क्या फतेहपुर के जनप्रतिनिधि और जिला कलेक्टर सीकर और बिजली विभाग के एमडी अजमेर इस खबर के बाद क्या कोई ठोस कदम उठाएंगे। क्या राजस्थान की चेयरमैन आरती डोगरा इन लापरवाह अधिकारियों को नोकरी करना सीखा पाएगी ये देखना होगा।

सीमा जांगिड़ की ड्यूटी पर
नगर परिषद में एसी चालू अधिकारी गायब
सहायक अभियंता दिनेश मीणा ड्यूटी पर
जे ई एन ऑफिस ग्रामीण
जे ई एन फतेहपुर सिटी पंखा लाइट चालू सीट खाली
एक्स ई एन बिजली विभाग चेंबर
ए ई एन पीडब्ल्यूडी गायब एसी चालू
एक्स ई एन पीडब्ल्यूडी का चेंबर
बीडीईओ की अधूरी नंबर प्लेट की गाड़ी

सीट से नदारद डॉक्टर पूर्णमल

ए ई एन विवेक का ऑफिस

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