दुर्गा वाहिनी के शौर्य प्रशिक्षण शिविर का द्वितीय दिवस उत्साहपूर्वक संपन्न
राजमाता अहिल्याबाई होल्कर और रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : चंद्रकांत बंका
झुंझुनूं : विश्व हिंदू परिषद के आयाम दुर्गा वाहिनी द्वारा आयोजित शौर्य प्रशिक्षण शिविर का द्वितीय दिवस उत्साह और ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। अभ्यास वर्ग में प्रांत संयोजिका प्रज्ञा महला एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में दुर्गा वाहिनी प्रांत सह संयोजिका डॉ. बाला मंचासीन रहीं।
कार्यक्रम का संचालन प्रांत मातृशक्ति सह संयोजिका आशा बागड़िया ने शांति पाठ एवं जयघोष के साथ किया। शिविर के दौरान बालिकाओं के बौद्धिक विकास सत्र में मुख्य वक्ता प्रांत संयोजिका प्रज्ञा महला ने राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके सुशासन, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनरुत्थान में योगदान को प्रेरणादायी बताया।
उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर उज्जैन, गया, अयोध्या और बद्रीनाथ सहित देशभर में एक हजार से अधिक मंदिरों, घाटों और धर्मशालाओं का निर्माण एवं जीर्णोद्धार करवाकर भारतीय संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रज्ञा ने रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य का उल्लेख करते हुए कहा कि झांसी की रानी ने 1857 के स्वाधीनता संग्राम में “मेरी झांसी नहीं दूंगी” का उद्घोष कर नारी शक्ति को नई प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई का जीवन साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
कार्यक्रम में प्रांत मंत्री राधेश्याम गौतम, जिला मंत्री जयराज जांगिड़ एवं प्रांत धर्म प्रचार सह प्रमुख रामानंद पाठक सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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