[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

राजस्थान में 44 संस्कृत स्कूल पूरी तरह जर्जर:विभाग ने माना-भवनों को ढहाया जाए, ये जानलेवा; तीन दिन में मांगी रिपोर्ट


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

राजस्थान में 44 संस्कृत स्कूल पूरी तरह जर्जर:विभाग ने माना-भवनों को ढहाया जाए, ये जानलेवा; तीन दिन में मांगी रिपोर्ट

राजस्थान में 44 संस्कृत स्कूल पूरी तरह जर्जर:विभाग ने माना-भवनों को ढहाया जाए, ये जानलेवा; तीन दिन में मांगी रिपोर्ट

झुंझुनूं : राजस्थान में 44 संस्कृत स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके है। इनमें पढ़ाई करना जान जोखिम में डालने जैसा है। संस्कृत शिक्षा निदेशालय ने खुद माना है कि इन भवनों को तुरंत ढहा देना चाहिए। 245 स्कूलों में 776 कमरे बेहद खराब स्थित में है और बैठने लायक नहीं है। 3239 कमरों में बहुत ज्यादा मरम्मत की जरूरत है।

झुंझुनूं में हालात खराब, 28 स्कूलों के 144 कक्षों को मरम्मत की जरूरत

झुंझुनूं जिले में संस्कृत शिक्षा का ढांचा चरमराया हुआ है। जिले के 28 संस्कृत विद्यालयों के भवन जर्जर हालत में हैं और कुल 144 कक्षा-कक्षों को तत्काल सुधार या मरम्मत की आवश्यकता है। इनमें से 4 विद्यालयों के 25 कमरे इतने खराब हो चुके हैं कि उन्हें कंडम घोषित कर कभी भी गिराया जा सकता है।

बजट घोषित, लेकिन जमीन पर काम शुरू नहीं

बता दें, राज्य सरकार ने बजट 2026-27 में जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए घोषणाएं की थीं। संस्कृत शिक्षा निदेशालय ने 24 मार्च 2026 को ही प्रस्ताव शासन उप सचिव को भेज दिए थे, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण मानसून से पहले काम शुरू नहीं हो पाया। वर्तमान में हजारों छात्र ऐसे भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।

निदेशालय सख्त, 3 दिन में मांगी गई अंतिम रिपोर्ट

उप निदेशक डॉ. महेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा- संभागीय अधिकारियों को जर्जर भवनों को जमींदोज (डिस्मेंटल) करने के निर्देश दिए हैं। तीन दिन में वर्तमान स्थिति की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।

संघ का आरोप – विद्यार्थियों और शिक्षकों की जान से खिलवाड़

संस्कृत शिक्षा विभाग के उपनिदेशक महेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि जर्जर भवनों को सुरक्षित तरीके से हटाना और सटीक रिपोर्ट तैयार करना जरूरी है। प्राथमिक अध्यापक संघ (लेवल-1) के स्टेट चेयरमैन खेमराज मीणा ने कहा कि स्कूलों की जर्जर छतें शिक्षकों और विद्यार्थियों के जीवन के साथ खिलवाड़ हैं। बजट का लाभ तभी है, जब मानसून से पहले जमीन पर काम दिखाई दे और प्रशासन तुरंत फंड जारी करे।

Related Articles