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बिजली विभाग की लापरवाही पर भड़के ग्रामीण, हरे पेड़ों की कटाई के विरोध में प्रदर्शन


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बिजली विभाग की लापरवाही पर भड़के ग्रामीण, हरे पेड़ों की कटाई के विरोध में प्रदर्शन

बिजली विभाग की लापरवाही पर भड़के ग्रामीण, हरे पेड़ों की कटाई के विरोध में प्रदर्शन

खेतड़ीनगर : बिजली विभाग द्वारा मेंटेनेंस के नाम पर हरे-भरे पेड़ों को जड़ से काटे जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। रविवार को ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए विभाग और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

रमेश पांडे के नेतृत्व में डायरेक्टर बंगले के सामने स्थित इंदिरा गांधी पार्क के पास बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिजली तारों के संपर्क में आ रही टहनियों की छंटाई करने के बजाय कर्मचारियों ने पूरे पेड़ों को ही नीचे से काट दिया, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

रमेश पांडे ने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय लापरवाही से वर्षों पुराने पेड़ों को नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि टहनियां काटनी थीं तो नियमों के अनुसार केवल वही काटी जानी चाहिए थीं, लेकिन समय बचाने के लिए पूरे पेड़ों को ही खत्म कर दिया गया।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर छोटे और जंगली पेड़, जो वास्तव में बिजली तारों को छू रहे थे, उन्हें नहीं हटाया गया, जबकि बड़े और विकसित पेड़ों को निशाना बनाया गया। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हरे पेड़ न केवल छाया प्रदान करते हैं, बल्कि क्षेत्र के तापमान को नियंत्रित करने, वायु को शुद्ध रखने और जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बिना अनुमति और सूचना के इस तरह पेड़ों की कटाई करना पर्यावरण संरक्षण नियमों का उल्लंघन है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस संबंध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि शनिवार को बिजली विभाग द्वारा मेंटेनेंस कार्य के चलते करीब तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद रखी गई थी। इसी दौरान पेड़ों की छंटाई के नाम पर कई हरे पेड़ों को जमीन के पास से काट दिया गया।

विरोध प्रदर्शन में विमल शर्मा, राजेश नारवाल, नवीन अग्रवाल, श्रवण सैन, जितेंद्र सोनी, विजय सिराधना, निक्कू, कुलदीप, प्रेम मीणा, राकेश, खालिद, यश शर्मा, विवेक, राजन बॉयल, सोनू गुर्जर सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

इन्होंने कहा 

समाजसेवी हरीराम गुर्जर

बिजली विभाग द्वारा पेड़ों की कटाई को लेकर उठे विवाद के बीच समाजसेवी हरीराम गुर्जर ने महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि विभाग को समय-समय पर बिजली लाइनों के आसपास उगी छोटी टहनियों की नियमित छंटाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में बड़े पेड़ों को काटने की नौबत ही न आए। हरीराम गुर्जर ने कहा कि यदि समय रहते रखरखाव (मेंटेनेंस) किया जाए तो न केवल पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सकता है, बल्कि बिजली आपूर्ति भी सुचारू बनी रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े पेड़ों की कटाई से जहां हरियाली को नुकसान पहुंचता है, वहीं ग्रामीणों में आक्रोश भी बढ़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिजली विभाग को ऐसी कार्यप्रणाली अपनानी चाहिए, जिससे ग्रामवासियों को बिजली संबंधी किसी भी प्रकार की दिक्कत या परेशानी का सामना न करना पड़े और साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके। – समाजसेवी हरीराम गुर्जर

श्याम लाल सैनी, महामंत्री – खेतड़ी कॉपर मजदूर संघ

जिस अधिकारी ने पेड़ काटने की अनुमति दी है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पेड़ों की कटाई की अनुमति किस आधार पर और किससे ली गई? यदि बिजली तारों से टहनियां टकरा रही थीं, तो नियमानुसार केवल उनकी छंटाई की जानी चाहिए थी, न कि बड़े और वर्षों पुराने पेड़ों की शाखाएं काटकर उन्हें ठूंठ बना दिया जाए। आगे भावुक होते हुए कहा कि वे पेड़ों को बच्चों की तरह पालते हैं। वर्षों की मेहनत और देखभाल से एक पौधा पेड़ बनता है, लेकिन कुछ ही समय में उसे काट दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी खुद पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पौधारोपण अभियान चलाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इस तरह की घटनाएं उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं। सैनी ने यह भी मांग की है कि जितने पेड़ों का नुकसान हुआ है, बिजली विभाग कम से कम पांच गुना अधिक पौधारोपण करे। उनका कहना है कि एक पौधे को पेड़ बनने में 5 से 10 वर्ष का समय लगता है, इसलिए हुए नुकसान की भरपाई के लिए ठोस कदम उठाए जाने जरूरी हैं। यह केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर भी उसकी सख्ती से पालना होनी चाहिए। – श्याम लाल सैनी, महामंत्री – खेतड़ी कॉपर मजदूर संघ 

बिड़दु राम सैनी, महामंत्री – खेतड़ी तांबा श्रमिक संघ KTSS

नियमों के अनुसार केवल टहनियों की छंटाई की जानी चाहिए थी, न कि मोटी डालों को काटकर पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जाए। वो बात अलग है यदि कोई पेड़ जरूरत से अधिक ऊंचाई ले लेता है या बिजली तारों के संपर्क में आता है, तो उसकी संतुलित छंटाई की जाती है। लेकिन इस मामले में कर्मचारियों ने लापरवाही दिखाते हुए बड़े-बड़े पेड़ों की मोटी शाखाएं काट दीं, जो पूरी तरह अनुचित है।यह केवल मेंटेनेंस नहीं बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला कार्य है। उन्होंने विभाग से भविष्य में इस तरह की लापरवाही नहीं करने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। – बिड़दु राम सैनी, महामंत्री – खेतड़ी तांबा श्रमिक संघ KTSS

रमेश पांडे, समाजिक कार्यकर्ता खेतड़ी

विवेकानंद पार्क और घाटी इंदिरा गांधी पार्क के पास विद्युत विभाग के कर्मचारियों द्वारा हरे-भरे पेड़ों की कटाई की गई, जो अत्यंत निंदनीय और चिंताजनक है। एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चला रही है और आमजन को प्रकृति बचाने का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों की ऐसी लापरवाही इन प्रयासों पर सवाल खड़े करती है। एक पेड़ को बच्चे की तरह वर्षों तक पाल-पोसकर बड़ा किया जाता है, लेकिन उसे मात्र कुछ ही मिनटों में काट दिया जाना न केवल पर्यावरण के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के साथ भी अन्याय है। पेड़ हमारे जीवन का आधार हैं—वे हमें शुद्ध वायु, छाया और संतुलित पर्यावरण प्रदान करते हैं। हमारा सरकार और संबंधित अधिकारियों से निवेदन है कि इस घटना की नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिल सके अन्यथा मजबूरन जन आंदोलन करना पड़ेगा जिस जवाब दारी विभाग की होगी। – रमेश पांडे, समाजिक कार्यकर्ता खेतड़ी

 

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