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कृषि व्यापारियों की समस्याओं को लेकर उपखण्ड अधिकारी को सोंपा ज्ञापन


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कृषि व्यापारियों की समस्याओं को लेकर उपखण्ड अधिकारी को सोंपा ज्ञापन

कृषि व्यापारियों की समस्याओं को लेकर उपखण्ड अधिकारी को सोंपा ज्ञापन

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : गजराज शर्मा

बीदासर : कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों की समस्याओं को लेकर एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने सरकार के नाम ज्ञापन सौंपते हुए समाधान की मांग तेज कर दी है एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो देशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। आपको बता दें कि ज्ञापन में बताया गया कि देशभर के लगभग 5 लाख खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेता पिछले कई वर्षों से विभिन्न प्रशासनिक और नीतिगत समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन बार-बार मांग उठाने के बावजूद ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इससे व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

प्रमुख मांगें और मुद्दे
एसोसिएशन ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से- खाद पर जबरन टैगिंग बंद हो उर्वरक कंपनियों द्वारा अनावश्यक उत्पादों को जबरन जोड़ने पर रोक लगाने की मांग।, फ्री ऑन रोड व्यवस्था लागू हो खाद की डिलीवरी सीधे विक्रेताओं के बिक्री केंद्र तक कंपनी द्वारा सुनिश्चित की जाए, जिससे अतिरिक्त खर्च का बोझ कम हो। डीलर मार्जिन बढ़ाने की मांग बढ़ती महंगाई को देखते हुए न्यूनतम 8% मार्जिन तय करने की बात कही गई। साथी पोर्टल में राहत: छोटे ग्रामीण विक्रेताओं के लिए पोर्टल की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की अवैध बीज बिक्री पर रोक: केवल अधिकृत डीलरों को ही बिक्री की अनुमति देने की मांग। विक्रेताओं को “दोषी” नहीं बल्कि “सहयोगी” माना जाए कंपनियों को जिम्मेदार ठहराने की बात कही गई। कीटनाशक नीति में सुधार: एक्सपायर्ड स्टॉक को वापस लेने की अनिवार्यता लागू की जाए। कानूनी प्रावधानों में ढील: नए बीज व कीटनाशक कानूनों में रिटेलर्स के लिए सख्त प्रावधानों को नरम किया जाए। जांच समिति का गठन: शिकायतों पर सीधे कार्रवाई से पहले जिला स्तर पर जांच समिति बनाई जाए। लाइसेंस निलंबन पर राहत: छोटे मामलों में लाइसेंस निलंबन के बजाय 21 दिन में स्वतः बहाली का प्रावधान हो।

आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन के अंत में एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि एक माह के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आगामी खरीफ सीजन से पहले देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। इससे कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

क्या बोले प्रतिनिधि
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे वर्षों से नियमों का पालन करते आ रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव और अव्यवहारिक नीतियों के कारण व्यापार करना मुश्किल हो गया है।

ज्ञापन देने वालों में ये रह शामिल
मोटाराम सारण, भंवरलाल सारण, गंगाराम सारण , गणेशाराम पिलानिला, बीरबलराम सारण, गोरधन राम बजाज,रामलाल ज्याणी, नन्दलाल दुसाद, रामप्रताप ज्याणी, श्रवणराम बिरड़ा,ओमप्रकाश माली, मोहर सिह ठाका, ओमप्रकाश ढाका, भीकाराम, खियाराम ज्याणी राजु राम, प्रेमराम ज्याणी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे

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