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अरबों की जमीन को 7 करोड़ में बेचने का मामला:ट्रस्ट के पदाधिकारी बोले-जिंदा पूर्वजों को मृत दिखाकर फर्जी डीड बनवाई, 1100 बीघा जमीन बेची


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अरबों की जमीन को 7 करोड़ में बेचने का मामला:ट्रस्ट के पदाधिकारी बोले-जिंदा पूर्वजों को मृत दिखाकर फर्जी डीड बनवाई, 1100 बीघा जमीन बेची

अरबों की जमीन को 7 करोड़ में बेचने का मामला:ट्रस्ट के पदाधिकारी बोले-जिंदा पूर्वजों को मृत दिखाकर फर्जी डीड बनवाई, 1100 बीघा जमीन बेची

फतेहपुर : फतेहपुर की पिंजरापोल सोसाइटी एवं नैना देवी चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने बुधवार को सीकर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि भूमाफियाओं ने साजिश रचकर ट्रस्ट की करीब 1100 बीघा (51.661 हेक्टेयर) कीमती जमीन को महज 7 करोड़ रुपए में बेच दिया। इतना ही नहीं आरोपियों ने जिंदा पूर्वजों को सरकारी कागजों में मृत बताया गया और फिर फर्जी डीड भी तैयार करवाई।

ट्रस्टी संजय कसेरा, विकास कसेरा सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि संत कुमार कसेरा, संजय कसेरा और उनके साथियों ने वर्ष 2011 में एक फर्जी ट्रस्ट डीड बनाई।

इस डीड में सबसे गंभीर धोखाधड़ी यह थी कि उस समय जीवित परिवार के सदस्यों और मूल ट्रस्टियों को मृत घोषित कर दिया गया। इस फर्जीवाड़े के जरिए मूल ट्रस्टियों के वारिसों को पूरी तरह बेदखल कर दिया गया और नए लोगों को फर्जी तरीके से ट्रस्टी बनाकर ट्रस्ट की सारी कमान हथिया ली गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूत दिखाते पदाधिकारी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूत दिखाते पदाधिकारी।

इन लोगों ने 1959 की मूल ट्रस्ट डीड की भावनाओं को पूरी तरह कुचल दिया। उन्होंने 2011 और वापस 2018 में ट्रस्ट के नियमों में गुपचुप तरीके से ऐसे संशोधन किए,जिससे उन्हें ट्रस्ट की संपत्तियां बेचने और ट्रांसफर करने के सभी अधिकार मिल जाएं। ये संशोधन पूरी तरह अवैध हैं क्योंकि मूल ट्रस्ट डीड में संपत्ति बेचने का कोई प्रावधान ही नहीं था।

अरबों की जमीन 7 करोड़ में बेची

आरोप है कि करीब 51.661 हेक्टेयर (लगभग 1100 बीघा) भूमि, जिसका बाजार मूल्य आज अरबों रुपए में है। उसे इन लोगों ने मिलीभगत कर मात्र 4.93 करोड़ रुपये ( डॉक्यूमेंट रेट) सहित कुल 7 करोड़ में बेच दिया। यह सीधा-सीधा मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक विश्वासघात का मामला है। यह जमीन महाराव श्री कल्याणसिंहजी द्वारा गौ-सेवा के लिए दी गई थी।

पिंजरापोल सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि इस भूमि को लेकर उपखण्ड अधिकारी न्यायालय (प्रकरण 94/2024) और सिविल न्यायालय (प्रकरण 59/2011) में मामले विचाराधीन हैं। न्यायालय ने भूमि के बेचान और कब्जे पर स्पष्ट स्टे(स्थगन आदेश) दे रखा है। इसके बावजूद 6 फरवरी 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में मात्र कुछ घंटों के भीतर रजिस्ट्री का खेल खेल दिया गया।

अब ट्रस्टी और समिति के लोगों ने मांग की है कि जिंदा पूर्वजों को मृत बताने के मामले में मुकदमा दर्ज हो। जमीन के बिकने के जो भी सेल एग्रीमेंट बने और जो फर्जी डीड तैयार हुई उसे भी निरस्त किया जाए। जमीन को गोचर से बंजर घोषित किया जाए। जिन लोगों ने फर्जीवाड़ा किया है उनसे ट्रस्ट के मूल रिकॉर्ड जब्त किए जाएं।

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