फतेहपुर में जनाक्रोश की गूंज: क्या अब जागेगा प्रशासन ?
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प; आवारा कुत्तों के आतंक और गंदगी के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान दाडून्दा
फतेहपुर : फतेहपुर शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था, आवारा पशुओं का जमावड़ा और खूंखार कुत्तों के बढ़ते हमले अब फतेहपुर की जनता के लिए बर्दाश्त से बाहर हो चुके हैं। प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ बुधवार को जन-आक्रोश का लावा फूट पड़ा। माकपा (CPIM) और एसएफआई (SFI) के कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान हालात तब तनावपूर्ण हो गए जब प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी और दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़पें हुईं।

नर्क बन चुका है शहर: महला
माकपा तहसील सचिव कॉमरेड हेमेंद्र महला और एसएफआई प्रदेश उपाध्यक्ष कॉमरेड कपिल राव ने तीखे शब्दों में कहा कि नगर परिषद की लापरवाही ने फतेहपुर को ‘नर्क’ में तब्दील कर दिया है। उन्होंने कहा, “शहर में कुत्तों का आतंक इस कदर है कि नागरिक सड़कों पर निकलने से डर रहे हैं, और आए दिन कुत्तों के हमले से लोग घायल हो रहे हैं। लेकिन प्रशासन गहरी नींद में सोया है।”
प्रमुख मांगें और 10 दिन का अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि अब कोरे आश्वासनों का दौर बीत चुका है। उनकी मुख्य मांगें हैं: शहर की नियमित सफाई और कचरा प्रबंधन। खूंखार कुत्तों के लिए ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम के तहत नसबंदी और टीकाकरण।
जर्जर सड़कों की तत्काल मरम्मत।
जनता ने प्रशासन को 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने दो-टूक कहा कि यदि निर्धारित समय में समाधान नहीं हुआ, तो आगामी आंदोलन की उग्रता की समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

आयुक्त के खिलाफ बढ़ रहा जन आक्रोश
शहर में चल रही चर्चाओं और सोशल मीडिया पर नगर परिषद आयुक्त अनिता खीचड़ के विरुद्ध माहौल काफी गर्म है। उन पर लग रहे भ्रष्टाचार के कथित आरोपों और उन्हें पद से हटाने की मांग ने इस विरोध प्रदर्शन को और अधिक हवा दी है। जनता का मानना है कि जब तक नेतृत्व में बदलाव या जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक शहर की सूरत नहीं बदलेगी।
सदन से उठी चिंगारी सड़को तक
प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्षद इस्माइल खान ने पूर्व में कई बार नगर परिषद में न केवल आवारा कुत्तों सांड और सफाई को लेकर मजबूती से आवाज उठाई बल्कि इन सभी कामों के टेंडरों को लेकर अनियमतित्ताओं के आरोप भी लगाए हैं। नगर परिषद में बार बार आवाज उठने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर जनता का गुस्सा सड़को पर दिखा, 15 दिवस पहले पार्षद इस्माइल खान की गाड़ी भी नगर परिषद के परिसर में सांडो द्वारा तोड़ दी गई थी जिसका मुकदमा दर्ज करने को लेकर कोतवाली पुलिस ने इनकार भी कर दिया था।
कहने को तो नगर परिषद शहर की संरक्षक है, लेकिन फतेहपुर के मौजूदा हालात देखकर लगता है कि यहाँ ‘स्वच्छता अभियान’ सिर्फ फाइलों की धूल झाड़ने तक सीमित रह गया है। प्रशासन की ‘मौन स्वीकृति’ ने आवारा कुत्तों को शहर का अघोषित मालिक बना दिया है। अब देखना यह है कि क्या 10 दिनों की यह ‘गूंज’ साहबों के कानों तक पहुँचती है या फिर फतेहपुर की जनता को एक और बड़े संघर्ष की आहुति देनी होगी।
उल्लेखनीय हैं कि फतेहपुर में सफाई व्यवस्था बदहाल हैं ढाई करोड़ का डंपिंग याड़ धूल फांक रहा हैं। तो वही आए दिन आवारा कुत्तों और सांडो के हमले से घायलों और मौतो की संख्या बढ़ रही हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस झड़प के बाद क्या रुख अपनाता हैं।
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