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80 दिन से न्याय की ‘गुहार’ और सत्ता का ‘बहरापन’-अधिवक्ताओं का धैर्य अब अग्निपरीक्षा पर, उपमुख्यमंत्री के आश्वासन की भी निकली ‘हवा’


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80 दिन से न्याय की ‘गुहार’ और सत्ता का ‘बहरापन’-अधिवक्ताओं का धैर्य अब अग्निपरीक्षा पर, उपमुख्यमंत्री के आश्वासन की भी निकली ‘हवा’

"न्याय के मंदिर" के रक्षक सड़क पर, सत्ता के गलियारों में सन्नाटा! उदयपुरवाटी का अन्याय, 80 दिन, शून्य समाधान, अनंत इंतजार, सुशासन के दावों की खुली पोल, 80 दिनों से जारी अधिवक्ताओं का दंगल

उदयपुरवाटी : कस्बे की जयपुर रोड़ पर स्थित तहसील परिसर में बार का धरना एवं विरोध प्रदर्शन 80 दिन से लगातार जारी है। लोकतंत्र में जब न्याय के पैरोकार ही न्याय के लिए सड़क पर उतर आएं और सरकार ‘कुंभकर्णी’ नींद सो जाए, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। अधिवक्ताओं के आंदोलन को 80 दिन हो गए हैं। पौने तीन महीने से जारी इस संघर्ष के बावजूद सरकार की चुप्पी ने अब जन-आक्रोश को हवा दे दी है। यह सवाल हर जुबान पर है, क्या यह वादों की सरकार है या दावों की।

गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व स्वयं उप मुख्यमंत्री ने इस मामले में हस्तक्षेप कर समाधान का भरोसा दिलाया था। लेकिन 80 दिन बीत जाने के बाद भी वे आश्वासन केवल सियासी जुमले साबित हुए। अधिवक्ताओं का कहना है कि सरकार के नुमाइंदे केवल समय टालने के लिए आश्वासन की घुंटी पिला रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। बार संघ अध्यक्ष संघ श्रवण सैनी ने कहा कि हम न्याय दिलाते हैं, आज हम खुद न्याय के लिए भीख मांग रहे हैं। यह सरकार की विफलता नहीं तो और क्या हैं।

नेताओं के दावे फेल, जनता का टूटा भरोसा
उदयपुरवाटी की इस तपती जमीन पर चल रहा धरना अब केवल वकीलों का नहीं, बल्कि आम जन की भावनाओं का मुद्दा बन चुका है। स्थानीय नेताओं ने चुनाव के वक्त जो बड़े-बड़े वादे किए थे। वे अब खोखले होते नजर आ रहे हैं। 80 दिनों की इस अनदेखी ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता के लिए जनता तथा उनके प्रतिनिधियों की पीड़ा कोई मायने नहीं रखती। 80 दिनों से लगातार धरना, फिर भी शासन-प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही हैं। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि अब आर-पार की लड़ाई होगी, जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। खामोश सत्ता में मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। इस दौरान सैकड़ो अधिवक्ता धरने पर बैठे रहते हैं।

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